Singrauli News : जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली पीडीएस की हालत सुधरने का नाम नहीं ले रही है। राशन दुकानों के कोटेदारों की मनमानी के आगे गरीब वर्ग के लोगों को उनके हिस्से का राशन नहीं मिल पा रहा है। कई राशन दुकानों के हितग्राहियों को तीन-चार माह से राशन नहीं मिल रहा है। शहर के वार्ड-45 नौगढ़ में स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान के हितग्राहियों ने राशन न मिलने से नाराज होकर मुख्य सड़क पर चक्काजाम कर दिया और खाद्य विभाग के अधिकारियों और कोटेदार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। परसौना-बरगवां मार्ग पर जाम लगाए जाने से वाहनों की आवाजाही दोनों तरफ से बंद रही, जिससे आम लोग परेशान रहे।
थंब इंप्रेशन लगवा लिया, नहीं दिया राशन
राशन न मिलने से परेशान हितग्राहियों का कहना है कि पिछले तीन-चार माह से हितग्राहियों को राशन नहीं दिया जा रहा है, जबकि कोटेदार द्वारा हर माह पीओएस मशीन में फिंगर इंप्रेशन लगवा लेता है। हितग्राहियों का कहना है कि सेल्समैन उनके हिस्से का राशन बाजार में बेच देता है, जब राशन लेने जाते हैं, तो दुकान बंद मिलती है। यह समस्या अकेले नौगढ़ राशन दुकान के हितग्राहियों की नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की हर तीसरी-चौथी राशन दुकानों की है। हितग्राही राशन लेने तो जाते हैं लेकिन दुकानदार दुकान नहीं खोलते, जिससे हितग्राही खाली हाथ वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं.
नहीं पहुंच खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी, पुलिस ने संभाला मोर्चा
राशन न मिलने से नाराज सैकड़ों हितग्राहियों और उनके परिजनों ने सड़क पर जाम लगाते हुए जमकर हंगामा किया। जाम की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने गुस्साये लोगों से बातचीत कर किसी तरह से मामले को शांत कराया। हैरानी इस बात की रही कि राशन विक्रेता के खिलाफ हितग्राही सुबह से सड़क पर उतरकर विरोध कर रहे थे, लेकिन जिम्मेदार खाद्य विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। हालांकि बाद में तहसीलदार ने हितग्राहियों से बातचीत कर मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ।
ऑफिस से बाहर नहीं निकलते अफसर
गरीब और पात्र हितग्राहियों को समय पर राशन मिले, इसकी जिम्मेदारी खाद्य आपूर्ति विभाग की है, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शायद ही कभी राशन दुकानों की जांच करने जाते हों। अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय से बाहर नहीं निकलते या यह कहें कि सेल्समैनों को खुला संरक्षण दे रखा है। अधिकारी कर्मचारी अगर दुकानों की नियमित रूप से जांच करें तो जिले की बदहाल राशन वितरण व्यवस्था में सुधार हो सकता है। जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी की तैनाती जिले में जब से हुई है, राशन वितरण व्यवस्था तभी से और बदहाल हो गई है।
गरीबों को बाजार से खरीदना पड़ता है राशन
नौगढ़ दुकान के गरीब हितग्राहियों राशन नहीं मिलने से कई हितग्राहियों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। हितग्राहियों का कहना है कि पेट पालने के लिए मजबूरी में उन्हें बाजार से महंगे दामों पर गेहूं-चावल क्रय करना पड़ रहा है।
कलेक्टर का आदेश भी बेअसर
जिले में पदस्थापना होने के दूसरे तीसरे दिन ही कलेक्टर गौरव बैनल ने कुछ राशन दुकानों की जांच की थी। कलेक्टर ने सभी एसडीएम, तहसीलदार, और खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि अपने-अपने क्षेत्रों की राशन दुकानों की नियमित रूप से जांच करें और राशन वितरण व्यवस्था में सुधार लाएं, लेकिन जिले में पदस्थ अधिकारी कलेक्टर के आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे हैं। अधिकारी अगर राशन दुकानों की जांच में दिलचस्पी दिखाते तो उपभोक्ताओं को अपने हिस्से का राशन प्राप्त करने के लिए सड़क पर नहीं उतरना पड़ता।
इनका कहना है
इस मामले में मैं अभी कुछ नहीं कह सकता। शुक्रवार को मैं शिविर में बासी बेरवहा गया था। जांच रिपोर्ट आएगी, तभी स्पष्ट होगा कि समस्या क्या थी। जहां तक बात तीन-चार महीनों से राशन न मिलने की है, तो इसकी शिकायत मुझे कभी नहीं मिली। – पीसी चंद्रवंशी, खाद्य आपूर्ति अधिकारी
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