Singrauli News: TET को अनिवार्य किए जाने और प्रथम नियुक्ति से वरिष्ठता बहाल करने की मांग को लेकर बुधवार को शिक्षकों ने प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को पूरा करने का आग्रह किया।
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने आक्रोश जताते हुए कहाकि वर्ष 1998 से शासन के निर्देशानुसार लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अब टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने को अनिवार्य कर दिया गया है, यह शिक्षकों के साथ अन्याय है। कई शिक्षक 25 से 50 वर्ष की आयु के बीच है। लंबे समय से सेवा दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें दोबारा परीक्षा देकर योग्यता साबित करने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो अव्यवहारिक है। शिक्षकों ने यह भी कहाकि सर्वोच्च न्यायालय और एनसीटीई द्वारा पहले ही उन्हें पात्रता परीक्षा से छूट दी जा चुकी है। ऐसे में विभाग द्वारा बार-बार इस शर्त को
टीईटी के विरोध में ज्ञापन सौंपते शिक्षक।
लागू करना न्यायालय के निर्णय की अवमानना जैसा है। इस आदेश से प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों और उनके परिजन मानसिक तनाव से गुजरने लगे हैं। शिक्षकों ने मांग की है कि टीईटी की अनिवार्यता को तत्काल समाप्त किया जाए और प्रदेश सरकार उनके पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करें। साथ ही प्रथम नियुक्ति से वरिष्ठता बहाल करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो यह आंदोलन जिले से लेकर राजधानी भोपाल तक चलाया जाएगा। शिक्षकों ने ज्ञापन के माध्यम मुख्यमंत्री एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों से आदेश आदर में संशोधन कर राहत प्रदान करने की मांग की।
निकाली गई रैली
सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं नगर निगम के समीप स्थित शिव मंदिर में एकत्रित हुए, जहां से रैली निकालकर कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च किया। कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिक्षकों ने प्रदेश सरकार के हालिया आदेश के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी नाराजगी जताते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान प्रदेश सरकार होश में आओ और भारत माता की जय के नारों से परिसर गूंज उठा।
ये सभी लोग रहे शामिल
प्रदर्शन करने वालों में सुमारू प्रसाद खैरवार, महेन्द्र प्रसाद द्विवेदी, रमेश पांडेय, केके द्विवेदी, सुनीता सौवले, रमेश शाह, डॉ. अरुण चतुर्वेदी, वीरेन्द्र सोनी, हितेन्द्र सोनी, तनुजा कुशवाहा, विजय लक्ष्मी, अर्चना शर्मा, शकुंतला पटेल, रघुवंश द्विवेदी, जय प्रकाश द्विवेदी, पवन शुक्ला के अलावा सैकड़ों अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल रहे।
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