Singrauli News: औद्योगिक कंपनियों पर प्रशासन की नरमी, कार्रवाई पर उठे तीखे सवाल

Singrauli News: सिंगरौली जिले में औद्योगिक कंपनियों के खिलाफ  प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर अब हालात बेहद संवेदनशील और सवालों से घिरे नजर आ रहे हैं।
श्रमिकों और आमजन के बीच यह धारणा तेजी से मजबूत हो रही है कि प्रशासनिक तंत्र कंपनियों के प्रति नरम रुख अपनाए हुए हैं। लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं, लेकिन उसके बाद ठोस कार्रवाई का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आता। इससे यह पूरा अभियान केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है।
पिछले एक महीने के दौरान बड़ी संख्या में श्रमिक अपनी शिकायतों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच चुके हैं। इन शिकायतों में बकाया वेतन, श्रम कानूनों का उल्लंघन, असुरक्षित कार्य परिस्थितियां और ठेका प्रथा में अनियमितताएं जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। बावजूद इसके  शिकायतकर्ताओं को न तो समय पर न्याय मिल पा रहा है और न ही उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकल रहा है। इससे नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब कुछ श्रमिक अधिकारियों पर सीधे  सेटिंग के आरोप लगाते नजर आते हैं।
आरोप है कि कुछ अधिकारी कंपनियों से सांठगांठ कर अपने चहेते लोगों को नौकरी दिलाने में लगे हैं, जबकि वास्तविक पीड़ि़तों की अनदेखी की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रही आवाजों ने प्रशासन की कार्यशैली पर गहरा संदेह खड़ा कर दिया है।

कार्रवाइयों का ब्योरा मांगने लगे शिकायतकर्ता

श्रम विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। विभाग की ओर से न तो कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी जा रही है और न ही कार्रवाई का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड साझा किया जा रहा है। यह चुप्पी लोगों के मन में अविश्वास को और बढ़ा रही है। अब जिले के नागरिक और श्रमिक संगठनों की ओर से मांग तेज हो गई है कि पिछले एक महीने में औद्योगिक कंपनियों के खिलाफ  हुई सभी कार्रवाइयों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक किया जाए। लोगों का कहना है कि जब तक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक प्रशासन पर भरोसा बहाल होना मुश्किल है।
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