Singrauli News : देवसर विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत जोबा में आंगनवाड़ी केन्द्र क्रमांक 3 के संचालन को लेकर लापरवाही मामला प्रकाश में आया है। गौरतलब हो की उक्त पंचायत आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, जहां विगत 16 वर्षो से लगातार किराये के कच्चे मकान संचालित है, आरोप है कि इतना ही नहीं चर्चा है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केन्द्र क्रमांक 3 में यदा-कदा ही नजर आती है, घर के सामने आम के पेड़ के नीचे हो रहे संचालन से केंद्र में आने वाले बच्चों, माताओं, किशोरियों को भी कभी-कभी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
मजे की बात तो यह है कि केंद्र में किसी भी तरह का दीवाल लेखन नहीं है, जिससे यह समझ में नहीं आता कि यह किसी का रहायसी मकान है या आंगनबाड़ी केंद्र, इतना ही नहीं बच्चों को खेलकूद तथा प्रारंभिक ज्ञान संबंधित कोई सुविधा सामग्री भी उपलब्ध नहीं है। वहीं मकान मालिक हेतलाल सिंह कि माने तो आंगनवाड़ी केन्द्र का किराये देने के लिए कहा गया था, परन्तु आज तक एक रुपये भी नही मिला, कार्यकर्त्ता से किराया कि माँग की जाती है, तो कार्यकर्ता द्वारा यह बताया जाता है की राशि खाते में डाल दी गई है, पर जब बैंक जाकर के चेक किया जाता है तो खाते की स्थिति पूर्ववत ज्यों की त्यों रहती है। बहरहाल अब देखने वाली बात यह होगी कि लगाए गए आरोप प्रत्यारोप में कितनी सच्चाई है, कब तक में विभाग उक्त मामले पर लगे आरोपों के संबंध में दूध का दूध और पानी का पानी कर पाता है।
आईसीडीएस अमला अनजान, पोषण आहार में गड़बड़झाला
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका के अनुपस्थित के कारण शासन द्वारा दिया जाने वाला पूरक पोषण आहार, बच्चों के लिए खिलौने तथा अन्य सामग्रियां उपलब्ध नहीं हो पाती, यहां तक की टीकाकरण सर्वे एवं स्वास्थ्य परीक्षण भी नहीं हो पाता है। जो यह दर्शाता है कि विभाग के आला अधिकारी फील्ड में न जाकर कार्यालय में बैठकर निपटा रहे हैं, क्या अधिकारी जमीनी हकीकत से बेखबर हैं। आरोप है कि केन्द्र में बच्चों का निवाला भी छीना जा रहा है, समूह संचालक द्वारा लगभग सात महीने से खाना, नाश्ता नहीं दिया जा रहा है, ऐसे में समूह की मनमानी और विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे बच्चे पोषण आहार से वँचित हो रहे हैं, आखिर में सरकार करोड़ों रुपये खर्च तो करती है, किन्तु अफसोश है, सरकारी पैसा जा कहाँ रहा है, जिसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
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