कंपनी का उच्च प्रबंधन भी साइट की स्थितियां जानने का प्रयास नहीं करता है, लिहाजा बरगवां बाजार में कभी जाम तो कभी जलजमाव की स्थितियां समय-समय पर निर्मित होती रहती हैं। अभी भी सुरक्षा को लेकर बरती जा रही लापरवाही के कारण स्थानीय स्तर पर श्रमिक नहीं मिल रहे हैं और काम बंद पड़ा हुआ है।

बरगवां बाजार में निर्माणाधीन आरओबी।
एक सेट सटरिंग से कर रहे कार्य बताया जाता है कि पीआरएल के द्वारा जरूरी मैटेरियल और संसाधनों की जानबूझ कर कमी की जा रही है। चार-चार सेट सटरिंग का उपयोग किया जाना चाहिए तो कंपनी एक सेट सटरिंग से कार्य कर रही है। जिसकी वजह से तीन-चार महीने में एक स्पॉन ढाल पाना मुश्किल हो रहा है। दिन-प्रतिदिन लेटलतीफी हो रही है और आम लोगों की समस्याएं बढ़ रही हैं।
मंदिर को शिफ्ट करने में लगा दिए 3-4 महीने
आरओबी के बरगवां की ओर सड़क पर एक हनुमान जी का मंदिर बना हुआ है। नियमानुसार मंदिर को पहले आसपास बना देना चाहिए था और सही समय देखकर मूर्ति की स्थापना करनी थी। फिर पुल का निर्माण जारी रखना चाहिए था लेकिन मंदिर को दूसरी जगह शिफ्ट करने में 3-4 महीने लगा दिए हैं। अभी तक मंदिर भी नहीं शिफ्ट किया जा सका है। किसी प्रकार का विरोध नहीं है फिर भी कंपनी मंदिर का बहाना लेकर काम नहीं कर रही है।
35 प्रतिशत कार्य बाकी
जानकारी के मुताबिक मौजूदा समय में आरओबी निर्माण के लिए कंपनी का 30 से 35 प्रतिशत कार्य बाकी है। उसके है, दो महीने बाद बारिश में काम की गति फिर धीमी हो जायेगी। इस समय पीक पर कार्य किया जा सकता है, लेकिन कंपनी जान बूझकर लेटलतीफी कर रही है, इसका खामियाजा पीआरएल को भुगतना पड़ेगा।
इनका कहना है
निर्माण कार्य करने वाली कंपनी की प्रगति बेहद धीमी है। जिसको देखते हुए रिटेन नोटिस दे दिया गया है। अभी भी कंपनी कर 30 से 35 प्रतिशत कार्य बाकी है। यदि कंपनी जून में काम पूरा नहीं कर पाती है तो उसे टर्मिक्ट किया जायेगा। जिसकी जिम्मेदारी निर्माण करने वाली कम्पनी पीआरएल की होगी।
– पीके सिंह बघेल, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी ब्रिज रीवा संभाग
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