Govt. HSS GIRLS WAIDHAN: शाउमावि कन्या वैढ़न के प्रभारी प्राचार्य ने वित्तीय अनियमितताओं के मामले में मर्यादा की सारी हदें पार कर दी हैं। पिछले साल एससी-एसटी वर्ग व संबल कार्डधारी छात्राओं से बोर्ड परीक्षा फार्म भरने के लिए 1250 रुपये वसूले गये थे, जबकि शासन के प्रावधान अनुसार उनसे मात्र 25 रुपये ही शुल्क के रूप में लिया जाना था। इस मामले का खुलासा हुआ तो एक-दो छात्राओं का पैसा वापस कर दिया था। शेष छात्राओं का पैसा लौटाने में आनाकानी करते रहे, कई दिन टालमटोल के बाद छात्राओं ने मांगना बंद कर दिया।
बाद में लाखों रुपये प्रभारी प्राचार्य अशोक मिश्रा लेकर बैठ गये। आज भी सैकड़ों छात्राओं का शुल्क विवरण पोर्टल पर लिखा दिखाई दे रहा है। हैरत करने वाली बात यह है कि इस बार भी प्रभारी प्राचार्य अपनी टीम के साथ एससी-एसटी व संबल कार्डधारी छात्राओं से अवैध वसूली के लिए रणनीति बनाने में जुट गये हैं, कोई भी अधिकारी इसके विरुद्ध कार्रवाई करना तो दूर जांच कराना भी उचित नहीं समझ रहा है।
मूल पदस्थापना स्थल हाईस्कूल गोभा भेजने की उठी मांग
प्रभारी प्राचार्य अशोक मिश्रा के अवैधानिक कार्यों से आजिज होकर शिक्षकों व बाबुओं ने विरोध करना शुरू कर दिया है। वह अशोक मिश्रा को मूल पदस्थापना वाले विद्यालय हाईस्कूल गोभा में भेजने की मांग करने लगे हैं। शिक्षकों ने बताया कि डीएमएफ के डेढ़ करोड़ रुपये से बैटरी चार्जर, कम्प्यूटर खरीदी दिखाई गई थी। आज भी यदि जांच करायी जाए तो कुछ सामग्री को छोड़ शेष नहीं मिलेगी। प्रभारी प्राचार्य के कारण स्कूल की छवि खराब हो रही है, इसलिए ऐसे व्यक्ति के साथ हम लोग काम करना उचित नहीं समझते हैं।
प्रवेश फार्म में भी अवैध वसूली
पिछले साल भी विद्यालय में सैकड़ों छात्राओं का प्रवेश लिया था। प्रवेश फार्म देने के बदले प्रति छात्रा से 5-6 सौ रुपये की वसूली की गई थी, जिसमें एससी-एसटी वर्ग की छात्राएं विशेष रूप से शामिल हैं। इस साल भी प्रवेश फार्म मोटी रकम लेकर बेची जा रही है। प्रभारी प्राचार्य की इस करतूत में तीन लोग ही शामिल रहते हैं, लेकिन इस साल अवैध वसूली को लेकर विद्यालय के शिक्षकों व बाबुओं में नाराजगी बढ़ गई है।
सरकार देती है छात्रवृत्ति, प्रिंसिपल वसूल रहे हैं
चाहे देश की सरकार हो या प्रदेश की, बेटियों को पढ़ाने और उन्हे आगे बढ़ाने के लिए छात्रवृत्ति दे रही है। लाडली लक्ष्मी योजना चला रही है। इसके अलावा साइकिल, स्कूटी और अन्य तमाम सुविधाएं दे रही है। स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल संचालित कर उनकी पढ़ाई का पूरा इंतजाम करती है। वहीं लाखों रुपये वेतन पाने वाले प्राचार्य और शिक्षक इसी फेर में रहते हैं इन कमजोर वर्ग की बेटियों से भी कुछ न कुछ हड़पा जाये। किसी किसान और गरीब घर की बच्ची 1250 रुपये कहां से लायेगी, इस बारे में तनिक भी नहीं सोचते हैं। यही वजह है कि आज भी बच्चियां ज्यादा पढ़-लिख नहीं पा रही हैं।
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