
करीब ₹10,000 करोड़ से अधिक की लागत से तैयार यह एयरपोर्ट आधुनिक तकनीकों से लैस “डिजिटल एयरपोर्ट” के रूप में विकसित किया गया है। इसे न सिर्फ भारत का सबसे बड़ा, बल्कि एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में भी शामिल किया जा रहा है। लगभग 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।
एयरपोर्ट के पहले चरण में 3.9 किलोमीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां विमानों के लिए समानांतर टेक-ऑफ और लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध है। फिलहाल यह सुविधा देश में केवल दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर ही देखने को मिलती है। इस तकनीक से हवाई यातायात तेज और अधिक सुगम होगा।
जेवर एयरपोर्ट के संचालन से न केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को फायदा मिलेगा, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों को बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी। इससे पर्यटन, व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह एयरपोर्ट “नए भारत की नई सोच और नई क्षमता” का प्रतीक है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे उत्तर प्रदेश के विकास में मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में रोजगार के हजारों नए अवसर भी सृजित होंगे।
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