Singrauli News: सिंगरौली जिले व प्रदेश को मीजल्स रूबेला से मुक्त करने की कवायद तेज हो गई है। आगामी दिसंबर तक निर्मूलन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्नवाल ने कलेक्टर को पत्र भेजा है। जिसमें लक्ष्य प्राप्ति के लिए जिला स्तर पर मासिक समीक्षा बैठक आयोजित करने के लिए कहा है। उन्होंने पत्र में कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मीजल्स रूबेला निर्मूलन का लक्ष्य दिसंबर 2026 निर्धारित किया है।
मीजल्स अत्यंत संक्रामक रोग है। इससे बाल मृत्यु व जटिलताओं की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में इस पर प्रभावी नियंत्रण एवं निर्मूलन अत्यंत जरूरी है। निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिले में नियमित टीकाकरण सेवाओं को सुदृढ़ बनाते हुए मीजल्स-रूबेला के प्रत्येक संदिग्ध प्रकरण की समय पर पहचान, जांच और त्वरित नियंत्रण कार्यवाही किया जाना जरूरी है। इसे लेकर अपर मुख्य सचिव ने जिला स्वास्थ्य समिति की प्रतिमाह होने वाली बैठक में जिला स्तर पर मीजल्स-रूबेला निर्मूलन और यू-विन पोर्टल की प्रगति की समीक्षा करने के लिए कहा है।
इन बिंदुओं पर कलेक्टर को करनी है मासिक समीक्षा
कलेक्टर यू-विन पोर्टल आधारित एमआर-1 और एमआर-2 टीकाकरण कवरेज की समीक्षा करेंगे। जिसमें 95 प्रतिशत से कम कवरेज वाले क्षेत्रों (विकासखंड व उपस्वास्थ्य केंद्र स्तर) की पहचान कर आवश्यक टीकाकरण मॉपअप राउंड की कार्यवाही सुनिश्चित कराएंगे। यू-विन पोर्टल पर दर्ज ड्यू और ओवरड्यू बच्चों का शत-प्रतिशत टीकाकरण भी कराना है। वहीं मीजल्स रूबेला के संदिग्ध प्रकरणों व संभावित प्रकोप की समीक्षा करते
प्रत्येक बच्चे व गर्भवती का यू-विन पोर्टल पर पंजीकरण
अपर मुख्य सचिव ने कलेक्टर को निर्धारित बिंदुओं पर नियमित मासिक समीक्षा बैठक कर सीएमएचओ को आवश्यक दिशा निर्देश प्रदान करने के लिए कहा है। जिससे जिले में मीजल्स रूबेला निर्मूलन का लक्ष्य तय समय सीमा में प्राप्त किया जा सके। इसके अलावा उन्होंने यू-विन पोर्टल पर प्रत्येक बच्चे के साथ हर गर्भवती महिला का पंजीयन संधारित करने की अपेक्षा भी की है।
दो अलग-अलग संक्रामक बीमारियां हैं मीजल्स-रूबेला
मीजल्स यानी खसरा और रूबेला यानी जर्मन खसरा दो अलग-अलग संक्रामक वायरल बीमारियां हैं, जो मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करती हैं, लेकिन इनके लक्षण तेज बुखार, खांसी, लाल दाने समान होते हैं। यह हवा के माध्यम से तेजी से फैलती हैं और जानलेवा हो सकती हैं। विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए रूबेला बहुत खतरनाक है। बचाव के लिए एमएमआर टीका कारगर है। खसरा पैरामिक्सो वायरस से होता है, जबकि रूबेला अलग वायरस से। इसमें 104 डिग्री तक तेज बुखार, शरीर पर लाल चकत्ते, खांसी, नाक बहने व आंखे लाल होने की समस्या होती है।
यह खांसने-छींकने से बूंदों से हवा के जरिये फैलता है। गर्भावस्था में रूबेला होने से गर्भपात, मृत जन्म होने की आशंका के साथ शिशु में जन्मजात बीमारियां बहरापन-मोतियाबिंद हो सकती हैं, इसे जन्मजात रूबेला सिंड्रोम कहते हैं।
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