Singrauli News: नगरीय क्षेत्र सिंगरौली के पचौर में करोड़ों रूपये की लागत से संयुक्त तहसील कार्यालय का निर्माण हुआ और तहसील संचालित है। परंतु इसका रख-रखाव, साफ-सफाई के प्रति यहां के जिम्मेदार अधिकारी व तहसीलदार बेसूध हैं। भवन में चारों तरफ मकड़ी के जाला एवं धूल के कण ही नजर आएंगे।
पचौर में संयुक्त तहसील कार्यालय भवन का निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग पीआईयू सिंगरौली के द्वारा जिसकी लागत करोड़ों रूपये हैं। जिसका लोकार्पण करीब दो वर्ष पूर्व हुआ था और यहां नगरीय तहसील दफ्तर संचालित है, परंतु दफ्तर की साफ-सफाई के प्रति तहसील का अमला दूर-दूर तक गंभीर नजर नही आ रहा है।
आलम यह है कि दफ्तर का ऐसा कोई कोना नही बचा है, जहां मकड़ी के जाला दिखाई न दे। साथ ही बरामदा, हॉल, रेलिंग में धूल के कण जमा है। शायद यहां के जिम्मेदार अधिकारी, तहसीलदार व नायब तहसीलदारोंं, राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारियों को दिखाई नही दे रहा है। यही कारण है कि दफ्तर में धूल के कण एवं मकड़ी के जाला का दबदबा है। तहसील में आने वाले कई कास्तकार नाम छापने से मना करते हुये सवाल उठाते हुये कहा कि एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता अभियान चला रखा है, परंतु तहसील के अधिकारी प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान पर पलीता लगाने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहे हैं।
ताजा उदाहरण तहसील दफ्तर पचौर-बैढ़न का है। आगे कहा कि यहां के जिम्मेदार जितने भी अधिकारी हैं, दफ्तर आते हैं। भवन परिसर की साफ-सफाई से दूर-दूर तक वास्ता नजर नही आ रहा है। यही कारण है कि तहसील परिसर में साफ-सफाई नदारत है और अधिकारियों की दिलचस्पी की शोर नही दिख रही है। हालांकि बताया जा रहा है कि उक्त भवन की साफ-सफाई के लिए नपानि से एक सफाईकर्मी के जिम्मे सौपा गया है। परंतु जिला मुख्यालय से करीब-करीब 4 किलोमीटर दूर तहसील मुख्यालय होने के कारण सफाई कर्मी भी अपनी ड्यूटी नही निभा पा रहा है। फिलहाल तहसील परिसर की अव्यवस्थाओं को देख लोग तरह-तरह के सवाल खड़े कर रहे है।
फायर एक्सटिंग्विशर एक्सपायरी के बाद लटका
तहसील भवन में एबीसी फायर एक्सटिंग्विशर लगा हुआ है, जिसका रिफिल 19 जून 2024 को हुआ और अगली रिफिलिंग 18 जून 2025 को किया जाना था। यानी 18 जून 2025 तक वैध था, इसके बाद रिफिलिंग कराना जरूरी था। आरोप तो यहां तक लगाया जा रहा है कि हाईड्रो ट्रेस्ट की पूरी जानकारी स्पष्ट नही दी गई है, जो एक कमी है। इसे अधूरी जानकारी मानी जा रही है। इतना ही नही फायर एक्सटिंग्विशर के ऊपर जाला, गंदगी दिखी है। मेंटेनस सही से नही हो रहा है। आरोप है कि राजस्व अमले का इसपर ध्यान नही जा रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण सिंगरौली है।
दो साल में ही परिसर की नालियां ध्वस्त
तहसील परिसर में पानी निकासी के लिए पीआईयू के द्वारा नाली का भी निर्माण कार्य कराया गया था। परंतु तहसील कार्यालय के प्रवेश द्वार शुरू होते ही नाली ध्वस्त हो गई है। बताया जा रहा है कि नाली निर्माण के दौरान सरिया का इस्तेमाल नही किया गया है। ध्वस्त नाली के मलवे में दूर-दूर तक सरिया नजर नही आई। वहीं नाली के समीप बाउंड्रीवॉल से मिट्टी कटाव रोकने के लिए नाली के सहारे पक्की फिनिसिंग कराई गई थी।
परंतु आरोप लग रहा है कि गुणवत्ता विहीन कार्य होने के कारण फिनिसिंग भी भरभरा कर ध्वस्त हो गई। हैरानी की बात है कि यही रास्ता अधिकारियों के आने-जाने का है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इसपर ध्यान नही दिया, लिहाजा नाली एवं फिनिसिंग निर्माण पर क्रियान्वयन एजेंसी पीआईयू को लेकर लोगबाग तरह-तरह के सवाल उठाने लगे हैं।
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