Singrauli News: ऊर्जाधानी के औद्योगिक गलियारों में इस समय एक ऐसा संगठित माफिया सक्रिय है, जो सरकारी राजस्व को हर महीने करोड़ों का चूना लगा रहा है। जिले के बड़े सीमेंट और सरिया व्यापारियों और रसूखदार ठेकेदारों के बीच उपजा यह ‘नापाक गठबंधन’ अब जीएसटी चोरी के लिए ‘बिल ट्रेडिंग’ का सहारा ले रहा है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, यह खेल 3 से 5 प्रतिशत के कमीशन पर आधारित है, जहाँ व्यापारी बिना किसी माल की सप्लाई के 18 प्रतिशत जीएसटी का फर्जी बिल ठेकेदारों को बेच रहे हैं। इस काले धन को सफेद करने और नकदी (Cash) के मिलान के लिए व्यापारियों ने अपने संस्थानों में काम करने वाले महज 10 हजार रुपये पाने वाले नौकरों और मजदूरों के नाम पर निजी बैंकों में 25 से 30 फर्जी खाते खोल रखे हैं।
हैरानी की बात यह है कि इन ‘शैल खातों’ का उपयोग करोड़ों के लेन-देन के लिए किया जा रहा है, जिसमें प्राइवेट बैंक के अधिकारियों की संलिप्तता भी संदिग्ध है। चूंकि जिले में NCL, NTPC और रिलायंस जैसी विशाल औद्योगिक इकाइयां हैं, वहाँ ठेकेदारों को खर्च दिखाने के लिए भारी मात्रा में जीएसटी बिलों की आवश्यकता होती है।
इसी मांग को पूरा करने के लिए दुकानदार अपने गरीब कर्मचारियों के पैन और आधार कार्ड का दुरुपयोग कर बैंकिंग सिस्टम में सेंध लगा रहे हैं। यदि जिला प्रशासन और जीएसटी इंटेलिजेंस विभाग इन संदिग्ध खातों की ‘मनी ट्रेल’ और व्यापारियों के ‘स्टॉक मिलान’ की बारीकी से जांच करे, तो सिंगरौली जिले का अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक घोटाला उजागर हो सकता है।
यह न केवल टैक्स की चोरी है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है, जिस पर प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। ये अलग बात है ये जानकारी जिले में पदस्थ जीएसटी अधिकारियों को अच्छे से पता है लेकिन कार्यवाही ना करना कहीं ना कहीं ये साबित होता है ये भी सिस्टम के हिस्से है।
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