UGC Bill 2026 Rules: UGC के नए नियम को लेकर सामान्य व एससी/एसटी/ओबीसी जातियों में बहस छिड़ी हुई है, जिससे देशभर के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में छात्रों और शिक्षकों का विरोध जारी है. छात्र – छात्राओं समानता और सुरक्षा बढ़ाने के बढ़ाने के उद्देश्य से बनाए गए ये नियम अब एक बड़ी राष्ट्रीय बहस की वजह बन गए हैं. सिर्फ यही नहीं अब देश में 1 फरवरी 2026 को भारत बंद का ऐलान भी कर दिया गया है। जिसे लेकर भाजपा व मोदी सरकार के गले की फास बन गई है मोदी सरकार के आगे कुआ पीछे खाई की तरह UGC नियम बन गया है, देश भर में UGC नियम शुरू हो गया है जिसे कहीं न कहीं प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह के सरकार के मंडल कमीशन के वजह से अल्प समय में ही सरकार चली गई थी। क्या इसी तरह मोदी सरकार की भी सरकार जाने वाली है।
BP सिंह के राह पर मोदी सरकार
प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह ने अगस्त 1990 में इन सिफारिशों को लागू करते हुए केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के अंतर्गत 27% नौकरियों का आरक्षण किया, जिसके कारण विरोध प्रदर्शन हुए और विरोध के बाद, भाजपा ने नेशनल फ्रंट से अपना समर्थन वापस ले लिया और उनकी सरकार अविश्वास प्रस्ताव में हार गई। सिंह ने 7 नवंबर 1990 को इस्तीफा दे दिया। उनका प्रधानमंत्री कार्यकाल 343 दिनों तक चला।
जिसके बाद मोदी सरकार 12 साल बाद यूजीसी नियम लाकर जातियो में मदभेद करने हेतु यूजीसी नियम लागू कर दिए जिसे लेकर पुरे देश में माहौल ख़राब है। एससी/एसटी/ओबीसी एवं सामान्य वर्ग को एक दूसरे से लड़ाने का कार्य सरकार द्वारा किया जा रहा है, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मोदी सरकार 2047 में सशक्त भारत-श्रेष्ट भारत, विश्व गुरु बनाने का सपना संजो रही है। ऐसे में अब यह सवाल उठता है कि क्या भारत विश्व गुरु बन सकता है या फिर प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह वाला हाल भाजपा का होगा। जिससे दसको तक सरकार नहीं आ पायी उसी राह पर भाजपा भी कंही न कहीं चलती दिखाई दे रही है।
1 फरवरी को भारत बंद का ऐलान
यूजीसी के प्रस्ताव के खिलाफ हम एक फरवरी को भारत बंद करेंगे। इसके बाद दो फरवरी को मध्यप्रदेश के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंपकर, उनसे पूछेंगे कि वह यूजीसी के इस प्रस्ताव का विरोध करते हैं या समर्थन करते हैं। अगर वह विरोध करते हैं तो उनके लिखित में आश्वासन लेंगे कि वह केंद्र सरकार के सामने हमारी बात को रखें। वहीं, यूजीसी के प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों को चूड़ियां भेंट की जाएंगी और उनकी अर्थी भी निकालेंगे। सभी जगह समर्थन करने वाले सांसदों का विरोध किया जाएगा।
दरअसल, यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस’ नाम से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था। जिसमें 15 जनवरी से देशभर की यूनिवर्सिटीज-कॉलेज में लागू कर दिया गया है। इसको लेकर सरकार ने दावा किया है कि इससे कॉलेजों में जाति, धर्म, लिंग, नस्ल, जन्मस्थान, विकलांगता के आधार पर होने वाला भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा। साथ ही नए नियम के अनुसार, हर यूनिवर्सिटी-कॉलेज को ईओसी बनाना जरूरी होगा।
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