World Tuberculosis Day:10 साल में क्षय रोग से सिंगरौली में मुक्त हुए 15 हजार से अधिक लोग

World Tuberculosis Day: आज वर्ष 2010 में सीधी जिले से अलग अलग होकर सिंगरौली में। में जिला टीबी केंद्र का शुरू हुआ था संचालन इसके बाद क्षय मुक्त भारत अभियान से मरीजों के चिन्हांकन और इलाज की की बढ़ती गई सुविधा, मगर नहीं कम हो रहे रोगी औद्योगिक बहुल सिंगरौली में हीमोग्लोबिनोपैथी यानी थैलेसीमिया, सिकलसेल, एनेमिया और हीमोफीलिया के बहुतायत रोगियों के बीच क्षय (टीबी) रोक भी एक बहुत बड़ी समस्या है। इसके लिए कोयला, क्रशर, रेत खदानों की बहुलता, फ्लाई पेश और धूल-धुआं जनित प्रदूषण, तंबाकू सेवन एवं आनुवंशिक कारण जिम्मेदार हैं। संक्रमण से भी टीबी रोग का दूसरों में फैलाव होता है।

हालांकि, राहत की बात यह है कि अब मरीजों के चिन्हांकन और उपचार व्यवस्थायें बनने से साल दर साल रोगियों में कमी आ रही है। वर्ष 2009 तक सिंगरौली में क्षय रोग मुक्ति से जुड़ी विभागीय गतिविधियां सीधी जिले से संचालित होती थीं, लेकिन वर्ष 2010 से सिंगरौली में जिला क्षय केंद्र संचालित सौ दिन में ढाई लाख की जांच में मिले 656 रोगी राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सिंगरौली में दिसंबर 2024 में 100 दिवसीय निक्षय शिविर अभियान शुरू हुआ था। जिसका समापन गत वर्ष 17 मार्च को हुआ।

इस अवधि में जिलेभर में 2 लाख 49 हजार 837 लोगों की जांच की गई। जिसमें से 656 लोग क्षय रोग से पीड़ित पाए गए। इसमें जिला क्षय केंद्र सिंगरौली में 282, खुटार सीएचसी में 115, देवसर में 55, सरई में 60 व चितरंगी में 144 क्षय पीड़ित पाये गए। इनमें से 250 मरीजों को निक्षय मित्रों ने पंजीकृत कराया। इन मरीजों में डीटीसी सिंगरौली के 282 मरीजों में 276 को फूड बास्केट दिए गए तो खुटार के 115 मरीजों में 230, देवसर के 55 में 110, सरई के 60 में 120 और चितरंगी के 144 मरीजों में 288 फूड बास्केट का वितरण किया गया।

जिला क्षय केंद्र के अनुसार वर्ष 2010 से अब तक सिंगरौली में 15 हजार से ज्यादा रोगियों को क्षय रोग से मुक्ति दिलाई जा चुकी है। उपचार का कोर्स पूरा करने में भी अब मरीज, उनके परिजन चैतन्य हुए हैं तो क्षय केंद्र के कर्मचारी भी नियत तिथि और समय पर दवा की डोज के प्रति सतर्क रहते हैं। निक्षय अभियान, निक्षय मित्र के माध्यम से मरीज को गोद लेने जैसी पहलें असरदार साबित हो रही हैं तो पोषण थैली और उपचार अवधि छह माह तक प्रतिमाह एक हजार रुपये वितरण भी क्षय मुक्ति में सहायक साबित हो रहा है।

हर साल मिल रहे औसतन दो हजार टीबी मरीज

जिले में जिस तरह जांच की संख्या बढ़ाने के साथ उपचार की व्यवस्थायें बेहतर हो रही है उसी अनुपात में मरीजों की संख्या में भी वृद्धि देखी के आंकड़े यही गवाही दे ज रही है। बीते तीन साल रही हैं। मसलन, वर्ष 2023 में जनवरी से दिसंबर तक 2200 लक्ष्य के मुकाबले 2075 मरीज मिले थे तो 2024 में 2800 लक्ष्य के मुकाबले 1911 मरीज चिन्हित किए गए थे। इसी तरह गल वर्ष 2025 में लक्ष्य दो हजार मरीज के सापेक्ष जनवरी से दिसंबर के बीच 2129 ठेगी चिन्हित हुए। गत वर्ष 50825 स्पुटम जांच का लक्ष्य था। इसकी तुलना में 52296 जांच हुई।

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