राज्य मंत्री राधा सिंह के विधानसभा में 80 साल बाद भी सड़क का इंतजार, मरीज को कंधे पर लेकर पहुंचे मुख्य सड़क तक

सिंगरौली :जिले के चितरंगी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत घवई के छुरदा टोला से सामने आई तस्वीरें गांव में मूलभूत सुविधाओं को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के करीब 80 वर्ष बीत जाने के बाद भी छुरदा टोला तक सड़क सुविधा नहीं पहुंच पाई है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को आवागमन के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

हाल ही में एक आदिवासी ग्रामीण की अचानक तबीयत खराब होने के बाद परिजनों को उसे कंधे पर बैठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद छुरदा टोला की सड़क समस्या एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

करीब एक साल से सोशल मीडिया पर उठा रही हैं आवाज

छुरदा निवासी काजल साह का कहना है कि वह पिछले करीब एक वर्ष से लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से गांव की सड़क समस्या को सामने रख रही हैं। इसके बावजूद आज तक छुरदा टोला तक सड़क निर्माण नहीं हो सका है। काजल साह ने इस मामले को लेकर सांसद डॉ. राजेश मिश्रा और चितरंगी विधानसभा की विधायक एवं राज्य मंत्री राधा सिंह पर सवाल खड़े किए हैं।

काजल साह ने नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों को वोट इसलिए दिया था कि उनकी मूलभूत समस्याओं का समाधान हो। जब गांव में किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक खराब होती है और उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए कंधे का सहारा लेना पड़ता है, तो फिर विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

चितरंगी विधानसभा में विकास पर उठ रहे सवाल

छुरदा टोला की यह समस्या इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह क्षेत्र चितरंगी विधानसभा के अंतर्गत आता है। काजल साह का आरोप है कि लगातार सोशल मीडिया पर मामला उठाए जाने के बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में अब तक गंभीर पहल दिखाई नहीं दी है।

उन्होंने सांसद डॉ. राजेश मिश्रा और राज्य मंत्री राधा सिंह से सवाल करते हुए कहा कि आखिर ग्रामीणों की इस मूलभूत समस्या का समाधान कब होगा? उनका कहना है कि गांव के लोगों को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

मंच से विकास की बातें या जमीन पर काम

काजल साह ने सवाल उठाया कि विकास की बड़ी-बड़ी बातें मंचों और प्रेस वार्ताओं में करना पर्याप्त है या फिर उन बातों का असर जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी गांव में आज भी मरीज को कंधे पर बैठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ रहा है, तो ऐसे हालात पर जिम्मेदारों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

अब छुरदा टोला के ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि उनकी सड़क की समस्या का समाधान कब होगा। क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मामले को संज्ञान में लेकर सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे या फिर ग्रामीणों को अपनी समस्या के समाधान के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा?

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