LPG News: गैस किल्लत से आम जनता परेशान, जिम्मेदार मौन

LPG News: एलपीजी को लेकर जिले में हालात सुधर नहीं रहे हैं, हालांकि जिम्मेदार विभागों के अधिकारी दावा करते हैं कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है। अगर गैस की कमी नहीं है तो गैस एजेंसियों के बारह लंबी-लंबी लाइनें क्यों लग रही हैं, यह बताने को कोई तैयार नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि एजेंसियों में जो लाइन लग रही है, उसमें ज्यादातर लोग ई. केवायसी करवाने के लिए लाइन में लगते हैं।

हालांकि जिले में कितने उपभोक्ताओं की ई. केवायसी नहीं हुई है, यह बताने के लिए अधिकारी तैयार नहीं हैं, जब ई. केवायसी के आंकड़ों की बात खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों से की जाती है तो वे गैस कंपनी पर बात डाल देते हैं। वहीं जिले में तैनात गैस कंपनियों के अधिकारियों से संपर्क करने पर अधिकारी फोन तक रिसीव नहीं करते हैं।

धूप से बचने पासबुक लाइन में रखते हैं पासबुक

जिम्मेदार अधिकारी भले ही गैस की कमी न होने का दावा कर रहे हों, लेकिन हकीकत देखनी हो तो गैस एजेंसियों के बाहर लगी लाइन को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों को गैस आसानी से नहीं मिल रही है। एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लाइन लग जाती है। एजेंसियों के बाहर धूप से बचने के लिए कोई खास व्यवस्था न होने पर लोग धूप से बचने के लिए खुद लाइन में नहीं खड़े होते, बल्कि अपनी गैस की पासबुक को लाइन में रख देते हैं।

दो लाख से अधिक है उपभोक्ता

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के मिलाकर जिले में 2 लाख 44 हजार 627 एलपीजी गैस के उपभोक्ता हैं, जिनमें से 1 लाख 84 हजार 258 उपभोक्ता उज्ज्वला योजना वाले हैं। उपभोक्ताओं को घरेलू और कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति की जिम्मेदारी गैस एजेंसियों पर है। आपूर्ति समय पर और सही तरीके से हो इसकी देखरेख की जिम्मेदारी खाद्य आपूर्ति विभाग के कंधों पर है। जिले में आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसी तीनों कंपनियों के गैस उपभोक्ता है। सबसे अधिक एलपीजी उपभोक्ता आईओसी और बीपीसीएल के है, एचपीसी के 18 हजार के करीब उपभोक्ता हैं।

एलपीजी गैस की डिमांड कारण है कि गैस एजेंसियों के बारह लंबी लाइनें लग रही है। लोगों को समय पर गैस नहीं मिल पा रही है, जो लोग ऑनलाइन बुकिंग कर रहे हैं, उनके घरों तक समय पर गैस सिलेंडर नहीं पहुंच पा रहा है। लोगों को समय पर और आसानी से गैस सिलेंडरों की सप्लाई होने लगे तो कोई भरी दोपहरी में एजेंसी के बाहर लाइन लगाकर क्यों खड़ा होगा। आयल एजेंसियों के अधिकारियों को ई. केवायसी के आकड़ों को सार्वजनिक करना चाहिए ताकि पता रहे कि कितने उपभोक्ता अभी तक ई. केवायसी नहीं करवाए है।

ये भी पढ़े-

Hero Splendor Plus: कम कीमत में शानदार माइलेज, अब आसान EMI प्लान के साथ

Singrauli News: कुएं में मिला महिला का शव, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप

Leave a Comment