Singrauli News: औद्योगिक दबाव में बैकफुट पर प्रशासन, जिले में तेज हुई चर्चाएं, श्रमिकों की शिकायतें अनसुनी, सुरक्षा मानकों पर अब भी सन्नाटा 

Singrauli News: सिंगरौली जिले में संचालित कोयला आधारित पावर परियोजनाओं और अन्य बड़े औद्योगिक संस्थानों में श्रम कानूनों, श्रमिक सुरक्षा प्रावधानों तथा औद्योगिक सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर जिला प्रशासन की गंभीरता अब सवालों के घेरे में है। पिछले माह 16 मार्च को कलेक्टर द्वारा उपखण्ड सिंगरौली, माड़ा, देवसर एवं चितरंगी के लिए चार संयुक्त जांच दल गठित किए गए थे, लेकिन करीब एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी इन टीमों की कार्रवाई जमीन पर नजर नहीं आ रही है।

 कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश थे कि संयुक्त जांच दल संबंधित औद्योगिक संस्थानों का भ्रमण करें, आवश्यकतानुसार शिविर आयोजित करें, श्रमिकों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याएं और शिकायतें दर्ज करें तथा सुरक्षा उपायों की मौके पर जांच करें। साथ ही 10 दिवस के भीतर विस्तृत तथ्यात्मक प्रतिवेदन भी मांगा गया था। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इन निर्देशों का हुआ क्या, क्या टीमों ने किसी संस्थान का दौरा किया, यदि किया तो कब और कहां और यदि जांच हुई है तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।

 श्रमिकों और स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि अब तक केवल बंधौरा की एक औद्योगिक कंपनी में आनन-फानन में जांच कराई गई, वह भी महज खानापूर्ति तक सीमित रही। कई श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गई और वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया गया। सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, कार्यस्थल पर जोखिम, स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं और श्रम कानूनों के पालन जैसे अहम मुद्दों पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।

क्या सिर्फ गुस्सा शांत करने के लिए गठित हुआ संयुक्त जांच दल 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि चार-चार संयुक्त जांच दल गठित होने के बावजूद बाकी औद्योगिक कंपनियों में अब तक जांच क्यों नहीं हुई। यदि टीमों ने दौरा किया है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक डोमेन में क्यों नहीं लाई गई। इससे यह आशंका और गहरी हो रही है कि जांच दल केवल लोगों का आक्रोश शांत करने के लिए गठित किया गया था। श्रमिकों का आरोप है कि प्रशासन ने दबाव में आकर केवल कागजी कार्रवाई की और वास्तविक निरीक्षण को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

चर्चाएं यहां तक हैं कि कई बड़े औद्योगिक संस्थानों के दबाव के चलते संयुक्त जांच दल बैकफुट पर है। यही वजह है कि पखवाड़ा बीतने के बाद भी न तो शिविरों की जानकारी सामने आई और न ही किसी विस्तृत रिपोर्ट का खुलासा हुआ। इससे श्रमिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जिले की औद्योगिक इकाइयों में हजारों श्रमिक कार्यरत हैं और उनकी सुरक्षा से जुड़ा यह मामला बेहद गंभीर है।

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