Singrauli News: इन दिनों शादी-ब्याह, व्रतबंध व अन्य शुभ धार्मिक कामकाज का सीजन चल रहा है। ऐसे आयोजनों की तैयारियों से लेकर आयोजन को सम्पन्न कराने के लिए आयोजकों को बड़ी मात्रा में कैश की जरूरत पड़ती है, लेकिन जिले में पिछले दो सप्ताह से ये हालात हैं कि लोगों को बैंकों में भी आवश्यकता के अनुसार रुपये नहीं मिल पा रहे हैं। एटीएम तो पहले से ही हवा उगल रहे हैं। ऐसे में लोग परेशान हैं कि आखिर कैश की व्यवस्था कहां से और कैसे करें? लोगों की परेशानी यह भी है कि वह अपने जीवनभर की जमा-पूंजी को बैंक में ऐसे ही अवसरों पर उपयोग करने के लिए जब रखे हैं, तो अब जरूरत के समय उन्हें अपना ही पैसा बैंक से नहीं मिल पा रहा है, जिससे कर? परेशानी बढ़ रही है। चिंता की बात यह भी है कि कैश की किल्लत के आगे बैंकों ने भी फिलहाल घुटने टेक दिये हैं और ये समस्या कम थमेगी, इस बारे में बैंकों के जिम्मेदार भी कुछ नहीं कह पा रहे हैं।
क्यों नहीं मिल रहा बैंकों में कैश?
बैकिंग सेक्टर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिले के बैंकों को कैश ही नहीं पा रहा है। बैंक रूटीन में आरबीआई से जितने कैश की डिमांड कर रहे हैं, उसके मुकाबले डिमांड का 50 फीसद ही बड़ी मुश्किल से मिल पा रहा है। यानी, अगर जिले में एक सप्ताह के लिए करीब 100 करोड़ रुपये कैश की जरूरत बैंकों को है तो उन्हें डिमांड करने पर लगभग 50 करोड़ रुपये ही बड़ी मुश्किल से उपलब्ध हो पा रहे हैं। ऐसे में इन दिनों शादी-ब्याह जैसे आयोजनों की जब भीड़ मची हुई है तो जाहिर है कि कैश की डिमांड भी सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना अधिक बढ़ गई है। पहले से कैश की किल्लत से जूझ रहे बैंक बढ़ी डिमांड के नुरूप तो दूर कैश की रूटीन डिमांड को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
एटीएम में कैश निकालने के लिए लगी कतार।
कुछ सूत्रों का तो यहां तक कहना है सिंगरौली प्रदेश के उन कुछ चुनिंदा जिलों में शामिल हैं, जहां कैश की उपलब्ध कम कराई जा रही है, क्योंकि जिले के बैंकों से कैश की निकासी के फ्लो के मुकाबले कैश जमा करने का फ्लो काफी कम है। यह ट्रेंड काफी लंबे समय से बना हुआ है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जिले के बैंकों से निकाले जाने वाले कैश का बड़ा हिस्सा जब जिले के बैंकों में वापस नहीं पहुंच रहा है, तो फिर वह कहां जा रहा है?
लोग परेशान, कुछ बिचौलिये सक्रिय
दरअसल, शादी-ब्याह जैसे बड़े आयोजन और व्रतबंध या अन्य छोटे आयोजनों में भी आयोजन के अनुसार काफी मात्रा में कैश पैसे की जरूरत पड़ती है। आयोजन से जुड़ी खरीदी से लेकर आयोजन दौरान होने वाले पूजन, अनुष्ठान और अनेकों रस्मों आदि परंपराओं को पूर्ण करने में कैश पैसे देने का चलन रहता है। इसलिए लोग कैश पैसे के अलावा इसमें करेंसी सिरीज की नोट भी बैंकों से निकालते हैं, जिससे नोटों की गड्डी में सभी नोट सीरियल से होते हैं और नये व साफ-स्वच्छ होते हैं, इसलिए इस प्रकार की करेंसी के लिए भी लोग इन दिनों खूब जोर आजमइश कर रहे हैं, लेकिन कैश की किल्लत के आगे लोगों की ये डिमांड भी बैंक पूरी नहीं कर पा रहे। दूसरी ओर सूत्र बता रहे हैं कि कैश की इस समस्या का फायदा उठाकर कुछ। कुछ बिचौलिये मार्केट में ऐसी करेंसी उपलब्ध कराकर अपनी जेब भरने में भी लगे हैं
क्या कहते हैं लोग?
घर में सगाई के आयोजन की तैयारियों के लिए कुछ लाख में कैश की जरूरत है, इसलिए जिस बैंक में एकाउंट है, उसमें अपने पैसे लेने गया तो बैंक में कैश की समस्या होने के कारण बैंक वालों ने असमर्थता जता दी। अब समझ में नहीं आ रहा क्या करें?
– विवेक वर्मा
मेरा लेन-देन कैश में रहता है। ऐसे में जो कैश पैसा आता है, उसे बैंक में जमा कर देता हूं और जरूरत पड़ने पर देने के लिए कैश निकालता भी हूं, लेकिन बैंक वाले कुछ समय से कैश की समस्या बताकर इन दिनों कुछ लाख में कैश देने से इनकार कर रहे हैं।
– सतीश
निजी कार्य के लिए एक लाख रुपये से अधिक की राशि कैश में निकालने के लिए बैंक गया था, लेकिन कैश की किल्लत बताकर बैंक वालों ने मुझे आरटीजीएस करने की सलाह दी, लेकिन मुझे तो कैप्श की ही जरूरत है, इसलिए मजबूरन वापस आना पड़ा।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
कैश की दिक्कत हमारे बैंकों में कुछ दिनों से चल रही थी, लेकिन अधिक समस्या नहीं थी। कल तक कैश आने वाला है, इसलिए समस्या सॉत्य हो जायेगी।
अमित श्रीवास्तव, चीफ मैनेजर बैंक ऑफ बड़ौदा
कैश की डिमांड जिले के बैंकों के द्वारा आगे जो भेजी जा रही है, उसके अनुरूप बैंकों को कैश उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जिले में कैश की निकासी के मुकाबले कैश जमा करने की मात्रा काफी कम है। यह भी चिंता का विषय है। शासन की योजना के तहत किसानों को कैश राष्शि उपलब्ध कराना है, उसके लिए भी कैश की समस्या आ रही है। इन हालातों से कलेक्टर साहब को अवगत कराया गया है।
– रंजीत कुमार, एलडीएम
ये भी पढ़े-
Singrauli News: रिहंद डूब क्षेत्र में अवैध रेत भंडारण पर कार्रवाई,150 घन मीटर रेत जप्त
Singrauli News: 35 लाख की चोरी, दो साल से सोती रही कोतवाली पुलिस