Singrauli News: शासकीय भवनों के निर्माण में एक गलत परिपाटी चल रही है। दरअसल, किसी भी शासकीय विभाग के भवन के लिए जमीन आवंटित कर निर्माण का टेंडर कर दिया जाता है। संविदाकार टेंडर पाने के बाद निर्माण शुरू कर देता है, लेकिन न तो विभाग और न संविदाकार भवन तक पहुंचने की प्राथमिक जरूरत सड़क के निर्माण की अनदेखी कर देते हैं। जिससे भवन तक पहुंचना कठिन हो जाता है। जिससे उसका उपयोग नहीं होता है।
वैढ़न के देवरा में निर्मित डॉक्टर आवास व एक शासकीय हॉस्टल इसकी नजीर है। इस कड़ी में शासकीय महाविद्यालय रजमिलान भी शामिल है। इसका टेंडर पाने वाले संविदाकार ने जुगाड़ का रास्ता बनाकर इसका निर्माण किया और अपना पेमेंट लेकर चलता बना। कई साल के निर्माण कार्य के बाद रजमिलान कॉलेज का भवन फरवरी 2025 में हैंडओवर हुआ था। यहां तक पहुंचने के लिए कोई मार्ग नहीं है।
इसे लेकर समाचारों का प्रकाशन कर जिम्मेदारों का ध्यान आकृष्ट कराया गया तो तत्कालीन कलेक्टर ने राजस्व अमले को भेजकर जुलाई 2025 में माड़ा-परसौना मुख्य मार्ग से कॉलेज तक पहाड़ी नाले के किनारे से शासकीय भूमि पर करीब चार-पांच सौ मीटर सड़क के लिए जमीन चिन्हित कराई। इसका बाकायदा पंचनामा तैयार किया गया। हालांकि, इतना होने के बाद भी सड़क निर्माण की शुरुआत नहीं हुई। लिहाजा, छात्र-छात्राओं और कॉलेज स्टॉफ को बीती बारिश में धान की रोपाई के लिए तैयार पानी भरे खेतों, मेड़ों से होकर आना-जाना पड़ा। इसमें उन्हें वर्षाकाल में जमकर परेशान झेलनी पड़ी।
धान की फसल कटने के बाद भी सड़क निर्माण की शुरुआत नहीं
गत बारिश के सीजन में चिन्हित जमीनों पर धान की फसल लहलहाने लगी। ऐसे में छात्र व स्टाफ ने बगल में निर्माणाधीन स्टेडियम के बीच से आना-जाना शुरू किया तो इसी बीच उसके ठेकेदार ने मैदान समतलीकरण के लिए उसे भी ट्रैक्टर से जोतवा दिया। इसके बाद भी छात्र और स्टॉफ उससे उपजे कीचड़ से होकर आते-जाते रहे। धान की फसल कटने के बाद उम्मीद थी कि सड़क बनेगी, मगर ऐसा नहीं हुआ। यह गर्मी भी सड़क बनने के इंतजार में बीतती जा रही है।
इस समस्या को लेकर 50 स्टूडेंट्स ने कराया लीड कॉलेज में ट्रांसफर
गत वर्ष आराजी 1669 रकबा 05340 हेक्टेयर में मार्ग चिन्हित किया गया था। गर्मी के दो माह बचे हैं। यदि इसमें सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो आगामी बारिश में भी छात्र-छात्राओं व स्टाफ को फिर से कीचड़ व खेतों में भरे पानी से होकर आना-जाना होगा। स्थिति यह है कि इस समस्या को लेकर कॉलेज में अध्ययनरत 204 छात्र-छात्राओं में से 50 ने अपना ट्रांसफर लीड कॉलेज में करा लिया है।
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