ट्रांसपोर्टर और एनटीपीसी के अधिकारियों की मिलीभगत से न केवल ओवरलोडिंग हो रही बल्कि राखड़ ट्रांसपोर्टिंग के लिए जिला प्रशासन द्वारा जो नियम और शर्ते तय की गई हैं उनका भी खुलेआम आम उल्लंघन हो रहा है। अपने मुनाफे के लिए ट्रांसपोर्टर और एनटीपीसी प्रबंधन के अधिकारी लोगों की जान जोखिम में डाल दिए हैं।
मुनाफा दिखा तो कई माननीयों के रिश्तेदार भी उतरे
राखड़ परिवहन में अच्छा खासा-मुनाफा दिखा तो जिले के कुछ माननीयों ने भी राखड़ परिवहन में अपने रिश्तेदारों को उतार दिया। सत्ता और विपक्ष दोनों के सम्माननीय राखड़ परिवहन का काम एक साथ काम कर रहे हैं। कुछ छत्तीसगढ़, यूपी, दिल्ली तक के ट्रांसपोर्टर राखड़ परिवहन में लगे हुए हैं। राखड़ परिवहन के लिए तय शतों का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है, लेकिन एनटीपीसी प्रबंधन से जुड़े लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। प्रबंधन से से जुड़े लापरवाह लोगों के चलते ही आज शहर के लोग दूषित राखड़ की चपेट में आकर सांस, दमा जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
मीणा और वर्मा की जोड़ी का कमाल
सूत्रों की मानें तो राखड़ परिवहन में जमकर खेला चल रहा है। खेल को अंजाम देने में मीणा और वर्मा की जोड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि यही दोनों लोग मिलकर अपनी पसंद के ट्रांसपोर्टर को राखड़ परिवहन के लिए तय करते हैं। ट्रांसपोर्टरों को लाभ पहुंचाने के लिए न तो न तो वाहनों में तिरपाल ढंकी जाती है, न सड़क में पानी का छिड़काव किया जाता है।
मीणा और वर्मा की जोड़ी का इतना दबदबा है कि उनके इशारे के बगैर राखड़ परिवहन से संबंधित कोई काम नहीं हो सकता है। हालांकि व्यवस्थित तरीके से राखड़ का परिवहन कराने की जिम्मेदारी भी इन्हीं लोगों पर है, लेकिन दी गई जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। मीणा और वर्मा कौन हैं, किसी ने आज तक नहीं देखा। कुछ का कहना है कि एनटीपीसी प्रबंधन से जुड़े अधिकारी हैं, परिवहन के दौरान सड़क पर गिरी गीली ठख। तो कोई कहता है कि इन्ही दोनों लोग राखड़ से संबंधित पूरा काम देखते हैं।
घरों के अंदर जम जाती हैं राखड़ की परतें
सड़क पर बिखरी राखड़ ने जीना मुश्किल कर दिया है। राखड़ उड़कर घरों में पहुंच रही है, जिससे सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है। राखड़ परिवहन के लिए जो नियम व शर्ते तय हैं, उनका पालन कराते हुए परिवहन होना चाहिए। दिलीप पनिका, बलियरी, शाहपुर राखड़ डैम से राखड़ का परिवहन रहवासी क्षेत्रों से किया जा रहा है। जिन रहवासी क्षेत्रों से राखड़ का परिवहन हो रहा है, वहां रहने वाले लोगों के घरों के अंदर तक राखड़ पहुंच रही है। लोगों का कहना है कि राखड़ लोड वाहन सड़क पर राखड़ गिराते हुए चलते हैं।
सड़क पर बिखरी राखड़ जरा सी हवा चलने पर उड़कर घरों के अंदर पहुंच जाती है। लोग जब सुबह उठते हैं तो उनके घरों के अंदर राखड़ की मोटी परतें जमी मिलती हैं। घर के अंदर दूषित राखड़ पहुंचने से लोग सांस की बीमारी के साथ-साथ स्किन की बीमारियों से भी ग्रसित हो रहे हैं।
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