Singrauli News: सहकार ग्लोबल की मनमानी के आगे नतमस्तक प्रशासन, सिस्टम की साठगांठ से लुट रही नदियां

Singrauli News: सिंगरौली जिले में रेत खनन को लेकर बड़ा घोटाला सामने आ रहा है, जिसमें नियम-कायदों की खुलेआम अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता ने हालात गंभीर बना दिए हैं। आरोप है कि ठेका कंपनी सहकार ग्लोबल द्वारा स्वीकृत क्षेत्र से दूर तक अवैध खनन किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।

नियमों को दरकिनार कर चल रहा अवैध खेल

जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। खदानों का सीमांकन (GPS पिलर) नहीं होने के कारण तय क्षेत्र से कई किलोमीटर दूर तक नदी से रेत निकाली जा रही है। इससे न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है।
नियमों के विपरीत भारी मशीनों का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है। पोकलेन और अन्य उपकरणों से हो रहे खनन ने स्थानीय मजदूरों का रोजगार छीन लिया है, वहीं नदी की पारिस्थितिकी पर भी खतरा मंडरा रहा है।

ग्रामीणों की जमीन पर जबरन रास्ते, बढ़ते विवाद

रेत परिवहन के लिए ग्रामीणों की पट्टे की जमीन पर बिना अनुमति रास्ते बनाए जा रहे हैं। कई स्थानों पर किसानों की जमीन काटकर डंपर मार्ग तैयार कर दिए गए हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। विरोध करने पर विवाद की स्थिति बन रही है।

ओवरलोडिंग से सड़कों पर खतरा

डंपरों में क्षमता से अधिक रेत भरकर परिवहन किया जा रहा है। ई-पास और ट्रांजिट नियमों की अनदेखी से सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। गिरती रेत और तेज रफ्तार वाहनों के कारण आम लोगों की जान जोखिम में है, लेकिन ट्रैफिक और पुलिस विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही।

पर्यावरणीय नियमों की भी अनदेखी

खनन कार्य के लिए आवश्यक पर्यावरण मंजूरी और माइनिंग प्लान का पालन नहीं हो रहा है। सूचना पटल तक नहीं लगाए गए हैं और वृक्षारोपण जैसी अनिवार्य शर्तें भी पूरी नहीं की जा रहीं। उल्टा, कई स्थानों पर मशीनों से पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अवैध खनन खुलेआम हो रहा है, तो संबंधित विभागों की अनदेखी या मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।

जवाबदेही तय करने की मांग

मामले को लेकर अब प्रशासन, पुलिस और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जनता जवाब चाहती है कि—

  • स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खनन कैसे जारी है?
  • अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग पर कार्रवाई क्यों नहीं?
  • ग्रामीणों की जमीन पर जबरन रास्ते बनाने की अनुमति किसने दी?
  • जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर मौन क्यों हैं?

सिंगरौली में रेत खनन का यह मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका खामियाजा पर्यावरण और आम जनता—दोनों को भुगतना पड़ेगा।

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