प्रदेश सरकार के गंगा जल संवर्धन योजना के तहत MPIDC ने सभी कारखाना संचालकों को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार करने के लिए निर्देशित कर दिया गया है। यह सिस्टम छत से गिरने वाले बारिश के पानी को अंडरग्राउंड में रिचार्ज करेगा, जिससे जल स्तर में स्तर में बढ़ोत्तरी होगी।
सवाल यह है कि पूरे कारखानों में तीन चार दशक में इस प्रकार के निर्देश नहीं आए हैं। ऐसा तब जब कारखाना एरिया में ही भूगर्भीय जलस्रोत अपरिमित हैं। पूरी तरह से डार्क इंडस्ट्रियल एरिया में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के निर्देश देना सूरज को दिया दिखाने जैसा है और यह कितना प्रभावी होगा। यह सवाल बड़ा इसलिए भी है कि हाल में स्थापित हुए कारखानों में भी इस प्रकार के निर्देश आखिर क्यों नहीं दिए गये यानि कारखानों के निर्माण के समय अथवा उत्पादन शुरू करने से पहले क्यों नहीं प्रभावी किया गया है। अब इसका निर्माण महज एक औपचारिकता हो सकती है।
पानी संरक्षण का पढ़ा रहे पाठ
एमपीआईडीसी ने स्वतः अलग-अलग स्थानों पर एक दर्जन बोरिंग की है, लेकिन अब तक कहीं से भी पानी नही मिला है। लिहाजा अब स्वयं नगर पालिक निगम से पानी लेकर कारखानों को आपूर्ति करने की तैयारी चल रही है, तो क्या इसी प्रयोग के फेल होने से कारखाना संचालकों को पानी देने से पहले उसके संरक्षण का पाठ पढ़ाया जा रहा है। लंबे समय से यहां पर पानी आपूर्ति करने की योजना बन रही है, जो अब तक पूरी नहीं हो पायी है।
कितना प्रभावी होगी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग
कारखाना संचालकों का कहना है कि अब वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए जाने का कितना फायदा होगा, जब वे बाहर से टैंकरों के जरिए पानी मंगा रहे हैं, तो इस सिस्टम को बनाना बेवजह खर्च बढ़ाने के अलावा और कुछ नहीं होगा। कई तो ऐसे कारखाने हैं, जहां पर बिल्डिंग की बजाय टिनशेड बने हुए हैं। इनमें पानी बचाने के लिए सिस्टम बनाने से पहले उसमें अतिरिक्त खर्च की जरूरत होगी, यदि फिर भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाता है तो यहां पर कितना प्रभावी होगा, इसकी जानकारी तो एमपीआईडीसी को भी नहीं होगी।
डिस्चार्ज वॉटर का नहीं किया जा रहा है ट्रीटमेंट
जिस प्रकार कारखाना संचालकों को आदेश दिए जा रहे है वे सिर्फ औपचारिकताएं ही हो सकती हैं, क्योंकि उसके लिए किसी प्रकार का मापदंड, साइज या ड्राइंग डिजाइन नही दिया जा रहा है। यानि इस निर्देश में कारखाना संचालकों को दिखावा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सभी कारखानों में मानसून आने से पहले प्रभावी हो पायेगा भी कि नहीं, नियमानुसार कारखानों से निकलने वाले यूज्ड वॉटर का भी ट्रीटमेंट कर बाहर बहाना चाहिए। इस पर किसी प्रकार का नियम लागू नहीं है।
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