
अवकाश होने के कारण कई वार्डों में बड़ी संख्या में बेड खाली थे, लेकिन मेल-फीमेल मेडिकल वार्डों में अच्छे खासे मरीज भर्ती थे। जो गर्मी के कारण परेशान थे। दैनिक भास्कर में समाचार प्रकाशन के बाद चिल्ड्रेन वार्ड के एसी दुरुस्त कराए गए थे। इसके साथ दावा किया गया कि 14 कूलरों की मरम्मत कराई गई है, लेकिन द्वितीय तल के वाडों में जो भी कूलर चलते मिले उनमें मोटर पंप ठप था। यहां तक कि ग्रास भी नहीं बदली गई है। दो फीमेल मेडिकल वार्डों में तो एक एसी तक नहीं दिखा। बिजली मैकेनिक ने 14 कूलरों को ठीक कराने की बात कही।
बताया कि इन 14 कूलरों में 3 नर्सिंग ऑफिसर संध्या सिंह, नौ नर्सिंग ऑफिसर चौरसिया, 1 ओझा मैडम और 1 रेखा दुबे को हैंडओवर किया गया है। जिन्होंने नर्सिंग स्टेशन और अपने संबंधित वार्ड में उसे रखा है। बताया कि उन्हें 14 कूलरों की मरम्मत के लिए ही कहा गया था।
मेल मेडिकल वार्ड के बुजुर्ग व अशक्त मरीजों की फजीहत
सबसे बुरी स्थिति आईसीयू के सामने स्थित मेल मेडिकल वार्ड की है। यहां जो कूलर चलता मिला वह गर्म हवा फेंक रहा था, क्योंकि उसका मोटर नहीं चल रहा था। यही नहीं इस कूलर की ग्रास भी नहीं बदली गई है। वार्ड में दो एसी में एक भी काम करता नहीं दिखा। मरीजों ने बताया कि कूलर में पानी नहीं भरा गया है। वहीं इस वार्ड के मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत नित्य क्रिया में होती है, क्योंकि शौचालय में ताला बंद होने के कारण उन्हें दूसरे वार्ड के टॉयलेट में जाना पड़ता है। वार्ड में कई ऐसे बुजुर्ग और अशक्त मरीज थे, जिनके लिए चालीस-पचास मीटर चलना भी दुष्कर है, मगर परिजनों के सहारे उन्हें मजबूरी में जाना पड़ता है। शौचालय के सौपेज की मरम्मत कराने की जगह उसमें ताला लगा दिया गया है।
एसी-कूलर न होने से बिगड़ने लगे पर्ची काउंटर कक्ष के कम्प्यूटर
भूतल पर पर्ची काउंटर के कम्प्यूटर व प्रिंटर गर्मी में वृद्धि होने के कारण अब खराब होने लगे हैं। यहां न एक कूलर है न एसी। सोमवार को दिन में पर्ची बनाने के बाद प्रिंट करने में प्रिंटर बहुत धीरे काम कर रहा था या फिर रुक जा रहा था। इसके बारे में बताया गया कि हीट होने के कारण ऐसा दो-तीन दिन से हो रहा है। पर्ची काउंटर पर आधा दर्जन कम्प्यूटर और चार-पांच प्रिंटर लगे हैं। ऐसे में कायदे से इस कक्ष में कूलर या एसी की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि उपकरण सही से काम करें।
द्वितीय तल के वार्डों में कूलिंग व्यवस्था बनाना जरूरी
जिला अस्पताल के प्रथम तल के वाडों में तो किसी तरह मरीज काम चला लेते हैं, लेकिन अप्रैल, मई और जून की भीषण गर्मी में सबसे ज्यादा परेशानी द्वितीय तल के वाडों में भर्ती होने वाले मरीजों को होती है। इसका कारण पर्याप्त संख्या में कूलर और एसी का न होना है। गत वर्ष तो यह स्थिति होती थी कि दोपहर 12 से शाम पांच-छह बजे तक मरीज अपना बेड छोड़कर ओपीडी एरिया में चले आते थे, क्योंकि गर्मी और उमस के कारण द्वितीय तल के वार्ड में रहना मुश्किल हो जाता था। इस स्थिति को देखते हुए द्वितीय तल पर पर्याप्त कूलर व एसी की जरूरत है।