
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पाइपलाइन फटने के बाद तेज दबाव के साथ राख मिश्रित गंदा पानी बाहर निकलने लगा, जो देखते ही देखते आसपास की जमीन और नालियों में भर गया। फ्लाई ऐश युक्त यह पानी पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। इसके संपर्क में आने से त्वचा रोग और सांस संबंधी समस्याएं होने की आशंका बढ़ जाती है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया गया। उनका आरोप है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे बार-बार ऐसी दुर्घटनाएं हो रही हैं।
चौंकाने वाली बात यह रही कि घटना के काफी देर बाद तक प्लांट प्रबंधन को इसकी जानकारी ही नहीं थी। इससे उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो बड़ा हादसा हो सकता है।
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