Bank Robbery Case: कोतवाली थाना क्षेत्र के बीच शहर में बैंक डकैती की वारदात को अंजाम देने के बाद से फरार चार मुख्य आरोपियों का सुराग घटना के एक महीने बाद भी पुलिस नहीं लगा पाई है। पुलिस की टीमें अभी भी बिहार, उड़ीसा, झारखंड में डेरा डाले हुए है।
डकैती कांड के प्रमुख आरोपियों की मदद करने वाले तीन आरोपी प्रभाकर सिंह उर्फ शमशेर सिंह पिता मिथिलेश सिंह 21 साल निवासी शाहगंज प्रोफेसर कॉलोनी हाल पता आलमगंज पटना, रविनंदन कुमार उर्फ चंदन पिता सुखनंदन कुमार 26 साल निवासी अशोकनगर थाना चित्रगुप्त नगर हाल पता राधाकृष्ण कॉलोनी परसात बाजार पुनपुन पटना, हर्षराज उर्फ अमन जायसवाल पिता अनिल कुमार जायसवाल 26 साल निवासी लवकुश कॉलोनी बहादुरपुर पटना बिहार को पकड़कर सिंगरौली ले आई है। आरोपी हर्ष उड़ीसा के कुचिंडा जेल में बंद बैंक राबरी का मास्टर माइंड पियूष जायसवाल का भाई बताया जा रहा है।
आरोपियों को उपलब्ध कराये थे मोबाइल और सिम
पुलिस की मानें तो पकड़े गये तीनों आरोपियों ने बैंक डकैती के मुख्य आरोपी फंटूस, कमलेश, पंकज, राजेश और छोटू को मोबाइल फोन और सिम उपलब्ध कराने के अलावा लूट के माल को ठिकाने लगाने में सहयोग किया है। पकड़े गए तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस ने पूछताछ के लिए दो दिन की रिमांड पर लिया है।
माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान पुलिस को कुछ अहम सुराग मिल सकते है, जिसके आधार पर पुलिस फरार चारों आरोपियों को पकडने में सफलता मिल सकती है। गौरतलब है कि पिछले 17 अप्रैल को हथियारों से लैस होकर आए पांच आरोपियों ने शहर के बैंक ऑफ महाराष्ट्र में डकैती की वारदात को अंजाम देकर 15 करोड़ रुपये कीमत के गोल्ड आभूषण और 20 लाख रुपये नकद लूटकर फरार हो गए थे।
सोना तो छोड़िये, लूट में उपयोग की गई बाइकें तक नहीं मिलीं
बैंक में डकैती की वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों द्वारा इतना अभेद प्लान तैयार किया गया है कि पुलिस उनके प्लान को भेद नहीं पा रही है। अब तक आधा दर्जन लोगों को पकड़ चुकी है, लेकिन लूट में उपयोग की गई बाइकें तक बरामद नहीं कर पाई है, जिनको आरोपियों ने छत्तीसगढ़ जंगल में फेंक दिया था।
बिहार से आरोपियों को गिरफ्तार करने में थाना प्रभारी अशोक सिंह के परिहार, सुधाकर सिंह परिहार, उदय करिहार, शिवम सिंह चौहान, सजीत सिंह बघेल, अरविंद द्विवेदी, रवि गोस्वामी, अजीत सिंह, विवेक सिंह, महेश पटेल शामिल थे।
बैंक कर्मियों की भूमिका हो तय
शहर के बैंक ऑफ महाराष्ट्र में हुई डकैती की वारदात प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी वारदात मानी जा रही है। पुलिस विभाग के मुखिया डीजीपी कैलाश मकवाणा को भोपाल से चलकर सिंगरौली आना पड़ा था। घटना की गंभीरता को देखते हुए कुछ दिन बाद सिंगरौली एसपी रहे मनीष खत्री का तबादला पुलिस मुख्यालय भोपाल कर दिया गया, लेकिन जिन बैंक कर्मियों की लापरवाही से इतनी बड़ी वारदात हुई, उनकी जिम्मेदारी आज तक तय नहीं की गई है।
एक सुरक्षा गार्ड तक नहीं रखा था। वहीं वारदात होने के बाद जिन लोगों का गोल्ड लूटा गया है, बैंक के कर्मियों द्वारा उनकी मदद तक नहीं की जा रही है। जिससे लोगों में बैंक प्रबंधन के प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
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