Singrauli News: आकाशीय बिजली से झुलसी महिला, एम्बुलेंस नहीं पहुंची; महरैल जंगल में तीन महीने से बंद है रास्ता

Singrauli News: जंगल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण अंचलों में मूलभूत सुविधाओं की हकीकत उजागर कर दी है। रविवार को बिजली की चपेट में आने से एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। घायल महिला की पहचान मुन्नी प्रजापति के रूप में हुई है। उसे समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए न एंबुलेंस गांव तक पहुंच सकी और न ही कोई अन्य वाहन उपलब्ध हो सका।

मजबूरी में ग्रामीणों ने महिला को खाट पर लिटाकर करीब दो किलोमीटर तक पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाया, जहां से उसे अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल महिला का उपचार जारी है। यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।

रास्ता बंद होने से ठप हुई आपातकालीन सेवाएं

ग्रामीणों के अनुसार, महरेल गांव तक पहुंचने वाला मार्ग पिछले लगभग तीन महीने से बाधित है। उनका आरोप है कि वन विभाग द्वारा रास्ता बंद किए जाने के कारण एंबुलेंस, डायल-112 सहित अन्य आपातकालीन सेवाएं गांव तक नहीं पहुंच पा रही हैं। कई बार आवेदन और मौखिक शिकायत करने के बावजूद अब तक रास्ता बहाल नहीं किया गया।

ग्रामीणों ने बताया कि महरेल गांव के लोग जिस मार्ग से वर्षों से आवागमन करते थे, उसे करीब तीन महीने पहले बंद कर दिया गया। गांव में लगभग 100 से 150 लोग निवास करते हैं, लेकिन बार-बार मांग उठाने के बावजूद रास्ता अब तक नहीं खोला गया।

घटना के बाद एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन मार्ग बाधित होने के कारण वह बीच रास्ते तक ही पहुंच सकी। इसके बाद ग्रामीणों ने बांस और खाट की सहायता से अस्थायी स्ट्रेचर तैयार किया और घायल महिला को पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाया, जहां से उसे अस्पताल भेजा गया।

हर आपात स्थिति में दोहराई जाती है यही मजबूरी

ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। गांव तक वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के कारण बीमारी, प्रसव, दुर्घटना या अन्य आपात स्थितियों में मरीजों को इसी तरह खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। उनका कहना है कि यदि समय पर सड़क उपलब्ध होती और एंबुलेंस गांव तक पहुंच पाती, तो घायल महिला को बिना अतिरिक्त जोखिम के समय रहते उपचार मिल सकता था।

ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि कई महीनों से रास्ता बहाल करने की मांग की जा रही है, लेकिन संबंधित विभाग ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर आवागमन का रास्ता बहाल कराने, पूरे मामले की जांच कराने तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही रास्ते की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में बड़ी जनहानि हो सकती है।

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