मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने आधुनिक युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। अमेरिकी मीडिया संगठन द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ किए गए हवाई हमलों में एआई कंपनी एन्थ्रोपिक के टूल का इस्तेमाल किया। खास बात यह है कि इसी कंपनी के टूल्स पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने सरकारी उपयोग को लेकर प्रतिबंध लगाया था।
सूत्रों द्वारा बताया गया है कि अमेरिकी सैन्य कमांड, विशेष रूप से यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM), अपने विभिन्न अभियानों में एन्थ्रोपिक के एआई सिस्टम का उपयोग करते हैं। यह एआई सिस्टम बड़े पैमाने पर डेटा विश्लेषण, रणनीतिक योजना और संभावित खतरों की पहचान करने में मदद करता है।
टारगेट पहचानने के लिए इस्तेमाल हुआ क्लॉड AI
जानकारों का कहना है कि बैन के बावजूद कमांड इस टूल का इस्तेमाल इंटेलिजेंस असेसमेंट, टारगेट की पहचान और युद्ध के हालातों को समझने (सिमुलेशन) के लिए कर रही है। इससे पता चलता है कि सैन्य ऑपरेशन्स में ये एआई टूल्स कितनी गहराई तक शामिल हो चुके हैं।
मस्क की xAI और ओपन एआई से समझौता
ट्रम्प प्रशासन ने कहा है कि सेना से इस तकनीक को पूरी तरह हटाने में कम से कम 6 महीने का समय लगेगा। यह प्रक्रिया काफी जटिल है क्योंकि डेटा-माइनिंग फर्म पालान्टिर जैसे पार्टनर्स भी इसी तकनीक के जरिए सैन्य डेटा प्रोसेस करते हैं। विकल्प के तौर पर पेंटागन ने अब इलॉन मस्क की कंपनी xAI और OpenAI के साथ क्लासिफाइड सेटिंग्स में काम करने के लिए समझौते किए हैं।
वेनेजुएला ऑपरेशन में भी हुआ था क्लॉड का इस्तेमाल
क्लॉड AI का इस्तेमाल वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने जैसे बड़े सैन्य ऑपरेशन्स में भी हुआ है। यह पहली बार था जब एआई का इस्तेमाल इतने बड़े और गुप्त ऑपरेशन में किया गया था। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई थी।
रक्षा विभाग ने कंपनी को बताया सुरक्षा के लिए खतरा
पेंटागन में AI मॉडल्स के इस्तेमाल को लेकर सरकार और एन्थ्रोपिक के बीच महीनों से विवाद चल रहा है। ट्रम्प ने शुक्रवार को ही सरकारी एजेंसियों को कंपनी के साथ काम बंद करने का आदेश दिया था और रक्षा विभाग ने इसे सुरक्षा के लिए खतरा और अपनी सप्लाई चेन के लिए जोखिम बताया था।
कंपनी बोली- AI से जान लेना गलत
यह विवाद तब बढ़ा जब एन्थ्रोपिक ने अमेरिकी रक्षा विभाग को ‘बिना किसी शर्त’ के अपने Tool का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी। इस वजह से उसका Contract कैंसिल कर दिया
रक्षा विभाग चाहता था कि एक बार Contract होने के बाद वे इस टूल को ‘सभी कानूनी स्थितियों’ में इस्तेमाल कर सकें। इसमें खुफिया जानकारी जुटाने से लेकर हमले के टारगेट तय करना शामिल है। यानी, सेना एआई को एक ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल करना चाहती है।
लेकिन एन्थ्रोपिक ‘Safe AI’ पर जोर देती है। उसने अपने Contract में यह शर्त रखने की कोशिश की कि उसके AI टूल का इस्तेमाल घातक सैन्य ऑपरेशन्स या सीधे तौर पर युद्ध में जान लेने के लिए न हो।
क्या है एनट्रॉपिक का ‘क्लॉड’ AI?
क्लॉड एक एडवांस AI चैटबॉट है, जो टेक्स्ट जनरेशन, डेटा एनालिसिस और कोडिंग जैसे कामों में माहिर है। इसे ओपन AI के पूर्व एग्जीक्यूटिव्स ने 2021 में शुरू किया था। हाल ही में एक फंडिंग राउंड के बाद एंथ्रोपिक की वैल्यूएशन 380 बिलियन डॉलर यानी, करीब 34 लाख करोड़ रुपए हो गई है।
युद्ध में कैसे मदद करता है AI?
- डेटा एनालिसिस: दुश्मन के ठिकानों की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करना।
- इंटेलिजेंस समरी: हजारों खुफिया दस्तावेजों का सारांश तैयार करना।
- लॉजिस्टिक्स: हथियारों और सैनिकों की आवाजाही का सटीक समय तय करना।
- टारगेट पहचान: घने रिहायशी इलाकों में छिपे हुए ठिकानों की पहचान करना।
यह भी पढ़े-
Singrauli News: सिंगरौली में झटका तार की चपेट में आने से हुई मासूम बच्ची की मौत