Bargi Dam Accident: बरगी में क्रूज डूबा 30 लोग थे सवार, 4 लोगो की हुई मौत, 8 लापता

Bargi Dam Accident: अरगडे बांध की अथाह जलराशि में गुरुवार शाम खुशियों का सफर उस समय मातम में बदल गया, जब मप्र पर्यटन विकास निगम का डबल डेकर क्रूज अचानक आए भीषण अंधड़ की चपेट में आकर पलट गया। मैकल रिसॉर्ट द्वारा संचालित इस क्रूज में 34 पर्यटक सवार थे। इस हृदयविदारक हादसे में अब तक 4 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 8 लोग अब भी लापता हैं। बचाव दल ने 22 लोगों को सुरक्षित बचा लिया। हालांकि, इनमें से कई लोग स्वयं तैर कर किनारे तक पहुंचे।

SDRF टीम जुटी बचाव कार्य में

हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए होमगार्ड एसडीआरएफ की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। मौके पर पहुंचे होमगार्ड डीआईजी डॉ. विशद तिवारी ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए 10-10 सदस्यों की तीन टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें विशेषज्ञ नोताखोर शामिल हैं। NDRF की 35 सदस्यीय टीम पहुंची एनडीआरएफ की 35 सदस्यीय टीम जबलपुर पहुंच चुकी है। स्थिति को संभालने और लापता लोगों को तलाश के लिए कटनी, नरसिंहपुर और सिबनी से भी अतिरिक्त टीमें बुलाई गई हैं। प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ गहरे पानी में सर्च ऑपरेशन चला रहा है, ताकि जल्द से जल्द लोगों को तलाशा जा सके। गोताखोर बांध की गहराई में उतरकर लापता लोगों को तलाश रहे हैं। नावों की मदद से बांध के विस्तृत इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

सेकेंडों में बदली जिंदगी

हादसे में सुरक्षित बचकर बाहर निकले पाटन बायपास के पास रहने वाले मनोज सेन ने बताया कि वह अपनी पत्नी ज्योति सेन, बेटी तनिष्का, अंशिका और बेटा तरिष्क के साथ क्रूज में सवार थे। सभी लाइफ जैकेट पहने हुए थे। अचानक मौसम बदला और तेज हवा चलते ही ऐसा लगा कि क्रूज में पानी भरने लगा और कुछ ही पल में कूज पलटने से लोगों की चीख-पुकार शुरू हो गई। मनोज का कहना है कि वे किसी तरह सुरक्षित बचकर बाहर निकल आए लेकिन पत्नी और बेटा-बेटियों का कुछ पता नहीं चला। वहीं देर रात मनोज के तीनों बच्चों को किसी अस्पताल में पहुंचाए जाने की खबर थी लेकिन पत्नी का कुछ पता नहीं चल सका था। -जैसा कूज में सवार सुरक्षित को मनोज सेन ने बताया तकनीकी खामियों की आशंका प्रथम दृष्ट्या बताया जा रहा है कि क्रूज आंधी-तूफान की वजह से डूसा, लेकिन तकनीकी खामियों की भी आशंका जताई जा रही है। क्रूज के पलटने की सही वजह अभी सामने नहीं आई है, जांच जारी है।

20 साल पुराना कूज 

कुज लगभग 20 साल पुराना बताया गया है। इसे वर्ष 2005 के आसपास बरगी जलाशय में पर्यटकों के लिए शुरू किया गया था। इस क्रूज की कुल क्षमता 70 सीटों की थी। क्रूज पर लाइफ जैकेट्स उपलब्ध थीं, लेकिन रिपोटर्स के अनुसार हादसे के वक्त कई यात्रियों ने उन्हें पहना नहीं था। नहीं था। क्रूज पर सवार प्रत्येक व्यक्ति के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य होती है। हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के परिवारजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

पल भर में नजारा बदल गया पानी भरा तो मच गई चीख-पुकार

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कूज शाम करीब 4:30 बजे रवाना हुआ था। सब कुछ सामान्य था, लेकिन एक घंटे बाद शाम करीब 5:30 बजे खमरिया टापू के पास कुदरत ने करवट बदली। आसमान में अचानक उमड़े बादलों और तेज हवाओं ने क्रूज को बुरी तरह असंतुलित कर दिया। देखते ही देखते सैलानियों की हंसी ठिठोली चीख-पुकार में बदल गई और क्रूज पानी में समा गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि खराब होते मौसम से घबराए कई पर्यटकों ने क्रूज को पानी में ले आने से मना किया, लेकिन कैप्टन नहीं माना। लोगों का आरोप है कि इस दौरान पूरे कुज स्टाफ का स्वैया बेहद असहयोगात्मक था और उन्होंने किसी की बात नहीं सुनी।

अंधेरे में रेस्क्यूः  5 घंटे बाद चमत्कारिक रूप से जीवित मिले 70 साल के रियाज 

रेस्क्यू के दौरान जब बचाव दल दुबे क्रूज तक पहुंचा तो चमत्कारिक रूप से मोहम्मद रियाज (70) नामक एक व्यक्ति उन्हें जीवित मिला। वह पानी के अंदर किसी तरह सांस लेने में सफल रहा था। बाहर निकाले जाने के बाद उसे पेट में तकलीफ होने के कारण इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। मो. रियाज के साथ पत्नी और दो बच्चे भी थे जिनका कुछ पता नहीं चल सका है। इसके अलावा दो और पर्यटकों को भी काफी देर बाद बाहर निकाला गया। हादसे के बाद क्रू का कैप्टन महेश पटेल गायब था। उसे करीब 1 घंटे बाद बाहर निकाला जा सका। रात करीब 10 बजे इलियाज हुसैन नामक युवक को गैस कटर से कू की बॉडी काट कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

हादसे का मुख्य कारण प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेज हवा के कारण क्रूज हिलने लगा और उसके निचले हिस्से में अचानक पानी भरने के कारण संतुलन बिगड़ा और क्रूज एक तरफ झुकते हुए, पल भर में पानी में डूब गया। गनीमत रही कि हादसा किनारे के पास हुआ और अन्य नावों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन समय पर शुरू हो गया।

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