दतिया:मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों से मात दी. कांग्रेस उम्मीदवार को कुल 66,575 वोट मिले, जबकि आशुतेष तिवारी के पाले में 60,741 वोट आए.
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा पर हुए उपचुनाव के आज नतीजे घोषित किए गए, जिसमें कांग्रेस ने बाज़ी मार ली. कांग्रेस के उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों से मात दी. कांग्रेस उम्मीदवार को कुल 66,575 वोट मिले, जबकि आशुतेष तिवारी के पाले में 60,741 वोट आए. हैरानी की बात ये है कि नरोत्तम मिश्रा के इलाके वाले पोलिंग बूथ पर भी बीजेपी हार गई. अब सवाल ये उठता है कि बीजेपी का गढ़ कही जाने वाली दतिया विधानसभा सीट उसके हाथ से कैसे फिसल गई.
टिकट का दावा कर रहे थे नरोत्तम मिश्रा
दतिया उपचुनाव के लिए नरोत्तम मिश्रा टिकट का दावा कर रहे थे। उपचुनाव की सीट रिक्त होने के बाद उन्होंने चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था लेकिन बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट नहीं दिया। नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया गया। बीजेपी ने जब टिकट की घोषणा की उस समय नरोत्तम मिश्रा अपने लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे।
अपना बूथ भी हारे नरोत्तम मिश्रा
नरोत्तम मिश्रा के बूथ में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ नंबर 121 पर कांग्रेस ने बढ़त बनाई। यहां से बीजेपी को 264 वोट मिले जबकि कांग्रेस के खाते में 291 वोट आईं। नरोत्तम मिश्रा दतिया विधानसभा सीट जीतने का दावा कर रहे थे लेकिन अपने ही बूथ में बीजेपी को जीत नहीं दिला सके।
बीजेपी क्यों हारी
नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं देने से उनके समर्थक नाराज थे। समर्थकों ने हाइवे जाम कर दिया था। जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। नरोत्तम मिश्रा के कई समर्थकों पर केस दर्ज किया गया था। वोटिंग के दिन समर्थकों का गुस्सा नजर आया।
बीजेपी ने दतिया में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट कर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनााया। आशुतोष तिवारी क्षेत्र के लिए नया नाम थे।
आजाद पार्टी से दमोदर यादव के चुनाव लड़ने से यादव वोट बैंक बीजेपी से खिसक गया। जिस कारण बीजेपी की हार हुई।
उपचुनाव की शुरुआत से ही भितरघात की खबरें सामने आ रही थीं लेकिन वोटिंग से पहले बीजेपी इस पूरे मामले को कंट्रोल नहीं कर पाई।
वोटिंग से पहले भोपाल में किसानों का आदोंलन भी किसानों की नाराजगी का कारण बना। जिस कारण से किसान मतदाता बीजेपी के साथ नहीं आए।
नरोत्तम मिश्रा के सियासी भविष्य पर सवाल
दतिया में बीजेपी की हार से नरोत्तम मिश्रा के सियासी भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। दतिया उपचुनाव में नाकांकन रैली में नरोत्तम मिश्रा भावुक हो गए थे। जिसके बाद कार्यकर्ताओं को यह मैसेज गया कि उपचुनाव में उनके नेता की उपेक्षा हुई है।
हेमंत खंडेलवाल की पहली बड़ी हार
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद हेमंत खंडेलवाल की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा दतिया विधानसभा उपचुनाव मानी जा रही थी। इस चुनाव में भाजपा की हार के बाद संगठन की रणनीति, टिकट चयन और नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि सरकार के बहुमत पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन राजनीतिक संदेश को लेकर यह परिणाम अहम माना जा रहा है
दतिया उपचुनाव बना पहली बड़ी परीक्षा
मध्य प्रदेश में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने हेमंत खंडेलवाल के कार्यकाल में दतिया विधानसभा उपचुनाव पहला बड़ा प्रत्यक्ष चुनाव था। इस चुनाव को संगठन और सरकार, दोनों के लिए प्रतिष्ठा का मुकाबला माना जा रहा था। मतगणना के रुझानों और परिणामों में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह बढ़त बनाते हुए जीत की ओर बढ़े, जबकि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी पीछे रह गए।
टिकट बदलने का फैसला पड़ा भारी
दतिया में भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला चुनाव का सबसे बड़ा दांव साबित हुआ। चुनाव प्रचार के दौरान संगठन ने नाराज कार्यकर्ताओं और समर्थकों को मनाने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय स्तर पर असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हो सका।
हार के बाद नेतृत्व पर उठे सवाल
भाजपा की हार के बाद विपक्ष और राजनीतिक हलकों में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की चुनावी रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के भीतर भी हार के कारणों को लेकर मंथन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। कई राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे संगठन की रणनीति और स्थानीय समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण परिणाम मान रहे हैं।