Singrauli News: ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन से प्रभावित देवसर के ग्राम झरिया के भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसान सहित परियोजना में प्रभावित कई पक्षकारों ने पांच साल बाद भी मुआवजा न मिलने पर भूमि वापस करने की मांग की है। उनका आरोप है कि अवार्ड पारित हुए लगभग 5 वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने न तो उन्हें मुआवजा राशि का भुगतान किया, न ही विधिवत भूमि का भौतिक कब्जा लिया और न राशि न्यायालय में जमा की गई। ऐसे में प्रभावितों ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के प्रावधानों के
अनुसार अपनी भूमि वापस किए जाने की मांग उठाई है।
प्रभावितों का कहना है कि अधिनियम की धारा 101 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि अधिग्रहित भूमि का पांच वर्ष तक कब्जा नहीं लिया जाता या परियोजना के लिए उसका उपयोग नहीं होता तो ऐसी भूमि मूल भूस्वामी या राज्य सरकार द्वारा स्थापित भूमि बैंक को वापस की जाएगी।
उनका आरोप है कि उनके मामले में अवार्ड पारित होने के पांच वर्ष बाद भी न विधिवत कब्जा लिया गया और न प्रतिकर राशि का भुगतान किया गया, जिससे अधिनियम की मंशा पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
प्रमुख सचिव राजस्व के निर्देश की अनदेखी
प्रभावितों ने यह भी कहा कि राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा जारी 18 फरवरी 2020 के निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिकर राशि को लेकर धारा 64 के तहत संदर्भ (रेफरेंस) की मांग की जाती है, तो केवल इस आधार पर भुगतान नहीं रोका जा सकता। धारा 77 के अनुसार प्रतिकर का भुगतान किया जाना चाहिए।
किसी कारणवश सीधे भुगतान संभव न हो तो धारा 77(2) के तहत पूरी राशि सक्षम प्राधिकरण (रेफरेंस कोर्ट) में जमा कराई जानी चाहिए। पीड़ितों का आरोप है कि प्रशासन ने न प्रमुख सचिव राजस्व विभाग के निर्देशों का पालन किया और न भूअर्जन अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों का। परिणामस्वरूप कई प्रभावित परिवार 5 वर्ष से अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों पर की जाए कार्रवाई
प्रभावित पक्षकारों ने शासन एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि यदि प्रशासन अधिनियम के अनुरूप न तो समय पर मुआवजा दे सका और न ही भूमि का विधिवत कब्जा (भू अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 38 में) ले सका है तो अधिनियम 2013 की धारा 101 के अनुसार अधिग्रहित भूमि मूल भूस्वामियों को वापस करने की कार्यवाही की जाए। साथ ही प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। दरअसल, इस तरह के मामलों में न तो रेफरेंस भेजा जा रहा है न राशि जमा की गई है। एक मामले में तीन पेशी पर रेफरेंस नहीं भेजा गया तो 8 जुलाई पेशी तिथि तय की गई है।
Singrauli News: राखड़ लोड हाइवा की चपेट में आने से दो गोवंशों की मौत, एक घायल