Singrauli Railway Station: रेलवे कॉलोनी में एक दशक पूर्व सीएमपीडीआई ने ड्रिलिंग की थी, जिसके बाद वहां पर भी कोयले की पतली सीम पाई गई थी। जिसके बाद मोरवा नगर को कोयला उत्खनन के लिए योजना तैयार की गई। इस योजना में सिंगरौली रेलवे स्टेशन को कहीं और स्थानांतरित करने की स्थितियां बनी थीं, लेकिन कोविड के दौरान जब मोरवा में नपानि, राजस्व व एनसीएल की संयुक्त टीम अवैध निर्माण रोक रही थी। उसी समय रेलवे ने कोल मंत्रालय में स्थितियां रखकर साफ कर दिया कि रेलवे स्टेशन नहीं हटाया जायेगा।
जिसके बाद कोल मंत्रालय का नक्शा बदलकर सीमित कर लिया गया। उसके बाद भी पूमरे ने अब तक सिंगरौली रेलवे स्टेशन की योजनाएं नहीं बनायी जा सकीं। गत दिवस डीआरयूसीसी की बैठक में भी एक सवाल के जवाब में धनबाद मंडल ने सिंगरौली विधायक रामनिवास शाह के एजेंडा पर जल्द ही विकास योजना बनाए जाने का आश्वासन दिया है। सवाल यह है कि अब कब सिंगरौली रेलवे स्टेशन के विकास की योजना तैयार होगी।
अति जरूरी सुविधाएं ही बचीं
सिंगरौली रेलवे स्टेशन को चलायमान रखने के लिए जरूरी सुविधाएं ही रखी जा सकी हैं। ऐसा भी कहा जा रहा है कि सिंगरौली में ऐस्केलेटर्स लगाया जाना था, लेकिन उसे हतोत्साहित करके मामला सिर्फ लिफ्ट तक पहुंच गया है। वह भी तीन वर्षों पहले मिली स्वीकृति के बाद भी अब तक पूर्ण नहीं हो पाया है। छोटी-बड़ी सुविधाओं पर तो जैसे ग्रहण ही लगता जा रहा है। मौजूदा समय में हर स्टेशन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है, लेकिन सिंगरौली में आज भी एक दशक पूर्व की स्थिति बनी हुई है।
RLDA ने भी किनारा
कोयले के रेल भूमि का अर्जन किए जाने के ऊहापोह की स्थिति ने सिंगरौली का भारी नुकसान कराया है। भारी राजस्व देने वाले सिंगरौली की भूमि को डेवलप करने के लिए आरएलडीए रेल लैंड डेवलपमेंट अथारिटी ने भी बड़ी योजना तैयार की थी, जिसके तहत 34 हेक्टेयर भूमि पर पीपीपी मॉडल से रेस्टोरेंट, मॉल और लॉज सहित एक मिनी शॉपिंग सेंटर विकसित करना था। कहा तो यह भी जा रहा था कि इस रेलवे स्टेशन को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जायेगा, लेकिन भू-अर्जन की छाया ने इस प्रोजेक्ट को भी दूर कर दिया।
पार्किंग व सार्वजनिक शौचालय तक नहीं
स्थिति यह है कि सिंगरौली रेलवे स्टेशन में पार्किंग के अलावा सबसे जरूरी और स्वच्छ रेल अभियान के तहत एक अदद सार्वजनिक शौचालय तक नही बनाया जा सका है। कर्मचारियों तक के लिए जरूरी सुविधाएं स्कूल, पार्क, क्लब या शुद्ध पेयजल तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जब धनबाद मंडल को इस बात का संज्ञान हो ही गया है कि अब रेलवे स्टेशन भू-अर्जन एरिया से बाहर है तो फिर विकासपरक योजनाएं कब बनेंगी?
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