डर के साये में गुजरती है रात
गर्मी के मौसम में इन तारों की स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है। फसलों के पास से गुजरते तार गर्म होकर झूलने लगते हैं। जिससे खेतों में काम करना मुश्किल हो जाता है। किसानों ने बताया कि वे रात के समय सिंचाई करने से डरते हैं, क्योंकि अंधेरे में इन तारों से खतरा और बढ़ जाता है। इससे फसल की सिंचाई समय पर नहीं हो पाती है। इसके कारण किसान आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव भी झेल रहे हैं। एक ओर उन्हें फसल की चिंता है, तो दूसरी ओर अपनी और परिवार की सुरक्षा का डर भी सता रहा है।
बरत रहा उदासीनता
ग्रामीणों के अनुसार करीब दो साल पहले बिजली विभाग की टीम ने क्षेत्र का सर्वे किया था। जल्द ही जर्जर तारों को बदलने का आश्वासन दिया था, लेकिन समय बीतने के साथ यह आश्वासन भी ठंडे बस्ते में चला गया।
आज तक न तो नए तार लगाए गए और न ही पुराने तारों की मरम्मत की गई। किसानों ने आरोप लगाया कि वे नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करते हैं। बावजूद इसके उन्हें सुरक्षित और सुचारू बिजली सुविधा नहीं मिल रही है। विभाग की इस उदासीनता से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और किसानों ने जिला प्रशासन और बिजली विभाग से मांग की है कि रमडिहा पंचायत के नरेना बैसवार बस्ती में जर्जर और उलझे बिजली तारों को प्राथमिकता के आधार पर बदला जाए। इसके साथ ही मजबूत पोल लगाकर सुरक्षित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि किसान बिना डर के खेती कर सकें।
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