Diabetes Van: दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों को अब शुगर, ब्लड प्रेशर और मुंह के कैंसर की जांच के लिए शहर नहीं आना पड़ेगा। मोबाइल मेडिकल यूनिट गांवों तक पहुंचकर जांच और शुरुआती इलाज की सुविधा देगी।
जरूरत पड़ने पर मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑनलाइन भी जोड़ा जाएगा। शुरुआती चरण में यह सुविधा सिंगरौली, बालाघाट और अनूपपुर जैसे दूरस्थ जिलों में शुरू होगी। यूनिट्स में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी रहेंगे, जो लोगों की स्क्रीनिंग करेंगे। इसके साथ स्कूलों में बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को सही खानपान और स्वस्थ लाइफस्टाइल के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जाएगा।
डॉक्टरों, नसों और ग्रामीण मरीजों में देर से गदा चलती हैं बीमारियां
एनएचएम की डायरेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में लोगों को मधुमेह और हाई बीपी जैसी बीमारियों का पता तब चलता है, जब स्थिति गंभीर हो जाती है। मोबाइल यूनिट्स के जरिए शुरुआती स्तर पर ही जोखिम की पहचान की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि दुर्लभ रोगों की शीघ्र पहचान और निःशुल्क जांच पर भी विशेष फोकस रहेगा।
पैरामेडिकल स्टाफ को गैर-संचारी रोगों की पहचान और नई तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस पहल के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच एमओयू हुआ है।
एम्स भोपाल के प्रतिनिधिमंडल से डिप्टी सीएम ने की ऑर्गन ट्रांसप्लांट पर चर्चा
भोपाल। भोपाल में मंत्रालय में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से एम्स भोपाल के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट गतिविधियों के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर चर्चा की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस क्षेत्र में निरंतर प्रयास कर रही है और ऑर्गन डोनर्स को “गार्ड ऑफ ऑनर” देने के साथ उनके परिजनों को 26 जनवरी और 15 अगस्त पर सम्मान देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
बैठक में आयुष्मान भारत योजना के तहत किडनी ट्रांसप्लांट पैकेज बढ़ाने और हार्ट व लंग ट्रांसप्लांट को शामिल करने पर विमर्श हुआ। ब्रेन-डेड डोनर्स की समय पर पहचान, त्वरित रेफरल और शासकीय अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों के समन्वय हेतु साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म के सुझाव रखे गए। एम्स निदेशक प्रो. डॉ. मधाबानंद कर ने प्रगति बताई, और उप मुख्यमंत्री ने सहयोग का आश्वासन दिया।
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