यह बदलाव विशेष रूप से ई-1 से ई-3 ग्रेड तक के अधिकारियों के लिए अहम माना जा रहा है, जिसमें न्यूनतम सेवा अवधि, प्रशिक्षण और प्रमोशन की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया गया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ये नए नियम 23 मार्च 2026 के बाद जारी होने वाली भर्तियों पर लागू होंगे। पहली वेतन वृद्धि एक वर्ष की प्रशिक्षण अवधि सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अगले महीने से लागू होगी। इसके बाद कंपनी की नीति के अनुसार हर वर्ष 1 अप्रैल को वार्षिक वेतन वृद्धि दी जाएगी।
एंट्री ग्रेड और वेतनमान में बदलाव
कोल इंडिया ने प्रवेश स्तर पर विभिन्न संवर्गों के लिए नए वेतनमान निर्धारित किए हैं। गैर-चिकित्सा संवर्ग के लिए ई-1 ग्रेड में 60 हजार रुपये से 1 लाख 80 हजार रुपये तक का वेतन तय किया गया है, जबकि चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए ई-2 और ई-3 ग्रेड में 70 हजार रुपये से 2 लाख 20 हजार रुपये तक का वेतनमान निर्धारित किया गया है। इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक आकर्षक और प्रतिस्पर्धी बनेगी।
प्रमोशन के लिए नई पात्रता शर्तें
नई व्यवस्था के अनुसार ई-1 से ई-2 ग्रेड में पदोन्नति के लिए न्यूनतम 3 वर्ष की सेवा अनिवार्य होगी, जिसमें प्रारंभिक प्रशिक्षण अवधि भी शामिल होगी। इसी प्रकार ई-2 से ई-3 प्रमोशन के लिए भी 3 वर्ष की सेवा जरूरी होगी। प्रमोशन रिक्तियों, सतर्कता मंजूरी और प्रदर्शन मूल्यांकन के आधार पर किया जाएगा।
कैडर स्कीम में बड़ा बदलाव
गैर-चिकित्सा और माइनिंग संवर्ग में कैडर योजना में बदलाव करते हुए अब ई-2 स्तर पर प्रवेश के लिए निर्धारित योग्यताएं ई-1 स्तर पर लागू मानी जाएंगी। वहीं माइनिंग अधिकारियों के लिए सेकेंड क्लास माइन मैनेजर सर्टिफिकेट (ओपनकास्ट और अंडरग्राउंड दोनों के लिए वैध) अनिवार्य किया गया है।
पदनाम और प्रमोशन सिस्टम में सुधार
कंपनी ने गैर-चिकित्सा संवर्ग में पदनामों में बदलाव करते हुए ई-1 ग्रेड में पहले वर्ष को प्रबंधन प्रशिक्षु और बाद में अधिकारी के रूप में मान्यता दी है। वहीं ई-2 ग्रेड में वरिष्ठ अधिकारी का पदनाम लागू किया गया है। इससे कर्मचारियों के करियर पाथ को स्पष्ट और संरचित बनाया गया है।
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