Waidhan Model Road: पिछली बरसात में ही शहर की इकलौती मॉडल रोड के धुरें उड़ गए थे। शहरवासी पिछले 8 माह से उबड़-खाबड़ सड़क पर चलने को मजबूर हैं। मॉडल रोड निर्माण को लेकर लंबी जद्दोजहद के बाद गत दिनों निर्माण कार्य शुरू हो गया है, लेकिन शहर की कॉलोनी और गली-मोहल्लों की अन्य सड़कों की बात की जाए तो उनका निर्माण करना तो दूर मरम्मत का काम तक नहीं हो रहा है।
आलम यह है कि शहर की सभी प्रमुख कॉलोनियों और मोहल्लों की सड़कें उखड़ी पड़ी हैं। उम्मीद थी कि बरसात के बाद उखड़ी सड़कों का निर्माण कार्य नगर निगम द्वारा करवा लिया जाएगा, लेकिन बरसात और ठंड गुजर गई, डेढ़ माह बाद फिर से बरसात का सीजन आ रहा है और सड़कों का निर्माण कार्य आज तक शुरू करना तो दूर, प्रपोजल तक तैयार नहीं हो पाया है।
सिंगरौली के पैसे से दूसरे जिलों में बन रही सड़कें
शहर की प्रमुख मॉडल रोड का निर्माण डीएमएफ की राशि से किया जा रहा है। भला हो कलेक्टर गौरव बैनल का जिन्होंने मॉडल रोड की चिंता की और डीएमएफ फंड से 9 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करवाकर सड़क निर्माण का कार्य शुरू कराया। जिले के डीएमएफ में करोड़ों रुपये हैं, लेकिन उस पैसे का उपयोग जिले में न होकर प्रदेश के अन्य जिलों में सड़क, कॉलेज, स्कूल, नाली, पंचायत भवनों का निर्माण हो रहा है। जिले के डीएमएफ से ही सड़कों की मरम्मत या नया निर्माण हो, इसके लिए जिले के माननीयों को प्रयास करना होगा।
इस बरसात में और कठिन होगी डगर
बरसात शुरू होने में अभी डेढ़ माह का समय शेष है, बचे हुए शेष समय पर अगर शहर की सड़कों का निर्माण और मरम्मत का काम नहीं किया गया तो समस्या और विकराल हो जाएगी। जो सड़के उखड़ी हैं, उनमें बरसात होते ही और बड़े-बड़े गड्डे हो जाएंगे, जहां पर सड़कें खुदी हुई हैं, वहां पर स्थितियां और बदतर होना तय है। लोगों को उम्मीद थी कि नगर निगम के पार्षद, महापौर, आयुक्त मिलकर शहर की बदहाल सड़कों से निजात दिलाने के लिए कोई रास्ता निकालेंगे, लेकिन आज तक कोई ठोस प्रयास नहीं हो पाए हैं। बरसात के पहले उखड़ी सड़कों की मरम्मत नहीं हुई तो आने वाले समय में सड़कें चलने लायक नहीं बचेंगी।
सीवर और गैस पाइपलाइन डालने में खराब हुईं सड़कें
शहर की जो सड़कें अच्छी थी, वह भी सीवरलाइन और गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए खोद दी गई थीं। कुछ जगहों पर संविदाकारों द्वारा पाइपलाइन बिछाने के बाद सुधार कार्य किया गया, लेकिन कई जगहों पर सिर्फ मिट्टी भरकर छोड़ दिया गया है। यानी शहर की बची-खुची सड़कों का कबाड़ा सीवर, गैस पाइपलाइन बिछाने वालों ने निकाल दिया है। संविदाकारों द्वारा खोदी गई सड़कों की रिपेयरिंग के काम में भी जिम्मेदार लोगों द्वारा ध्यान नहीं दिया गया, जिसके चलते रिपेयरिंग भी ठीक से नहीं हुई और सड़कें खराब हो गयी हैं।
धूल से सनी रहती हैं सड़कें
मोहल्ले और कॉलोनियों की उखड़ी सड़कें चलने लायक नहीं बची हैं। जगह-जगह से उखड़ी सड़कों से धूल उड़ती है, जिससे आम लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है। जब भी कोई चारपहिया वाहन खुदी हुई सड़कों से निकलता है तो धूल उड़कर लोगों के घरों में पहुंच जाती है। पचखोरा एमपीईबी मार्ग, अंबेडकर चौक, रामलीला मैदान मार्ग, बलियरी मार्ग, डीएवी रोड, हर्रई मार्ग सभी उखड़े पड़े हुए हैं। इन मागों में इतने बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं कि दोपहिया वाहनों का निकलना तक मुश्किल हो गया है।
बजट के अभाव के चलते नहीं बन रहीं सड़कें
नगर निगम की माली हालत इन दिनों खराब है। बजट के अभाव में नगर निगम नई सड़कें बनवाना तो दूर, पुरानी उखड़ी पड़ी सड़कों की मरम्मत तक नहीं करवा पा रहा है। यही कारण है कि बरसात के समय से उखड़ी पड़ी सड़कें आज तक नहीं सुधर पाई हैं। लोग उखड़ी और ऊबड़ खाबड़ सड़कों पर चलने के लिए मजबूर हो रहे हैं। आय के स्रोत बढ़ाने के लिए नगर निगम द्वारा भी कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। शहर की उखड़ी पड़ी सड़कों का सुधार कार्य कब किया जाएगा, यह बताने के लिए नगर निगम के अधिकारी तैयार नहीं हैं।
क्या कहते हैं शहरवासी
रामलीला मैदान के बगल से बलियरी जाने वाली सड़क बरसात से ही उखड़ी पड़ी हुई है। उम्मीद थी कि बरसात बाद नई सड़क बनेगी, लेकिन नई सड़क बनना दूर मरम्मत तक का काम नहीं किया गया है।
-जगदीश गुप्ता, बलियरी
शहर के सबसे भीड़भाड़ वाली जगह अंबेडकर चौक में बीच सड़क पर इतने बड़े-बड़े गड्ढे हैं कि आए दिन वाहन चालक हादसे का शिकार हो रहे हैं। बीच चौराहे पर गड्डे होने से आए दिन जाम भी लग रहा है।
-सुरेश अग्रहरि, बैढ़न
कॉलोनी और गली-मोहल्लों की तमाम सड़कों में बड़े-बड़े गडढ़े हो गए हैं, गड्डों की वजह से सड़क पर चलना मुश्किल हो रहा है, लेकिन मरम्मत कार्य करवाने के लिए न तो पार्षद आगे आ रहे हैं, न महाघौर और न ही जिम्मेदार अधिकारी।
-विक्रम शाह
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