Singrauli News: पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यकाल के दौरान शिक्षा विभाग में हुए कथित करोड़ों की अनियमितता की चर्चा अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि नवनियुक्त जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी ने पदभार ग्रहण करते ही उस पर पर्दा डालने का प्रयास शुरू कर दिया है।
उन्होंने 25 जून को एक आदेश जारी करते हुए विद्यालयों में पत्रकारों व जन सामान्य के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। उनके इस तुगलकी फरमान से आम लोगों में आक्रोश बढ़ गया है। शहर में चर्चाओं को दौर शुरू हो चुका है कि अब कौन सा रहस्य विद्यालयों में छिपा है कि उससे बचने का प्रयास किया जाने लगा है।

यह शासकीय स्कूल आम आदमी के टैक्स के पैसों से संचालित होते हैं, इसलिए उन्हें जानने का हक बनता है कि स्कूल में शिक्षक कितने बजे उपस्थित होते हैं। वहां की शैक्षणिक गतिविधियां कैसी हैं, लेकिन केवल सरकारी कार्य में बाधा डालने के कानून का सहारा लेकर कहीं नए अनियमितताओं का दौर तो नहीं शुरू हो जाएगा।
गरीब बच्चों के अधिकारों पर डाका
इस समय शासकीय स्कूलों में आर्थिक व सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं, इसलिए इन बच्चों को बौधिक रूप से उत्कृष्ट बनाने के लिए शासन द्वारा हर साल नई-नई योजनाएं लागू की जा रही हैं। जिसमें तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं, इसके लिए शासन द्वारा हर साल करोड़ों रुपये शिक्षा विभाग में आते हैं, लेकिन उसकी बंदरबांट कर ली जाती है। पिछले दो वर्ष के दौरान 20 करोड़ रुपये का गबन हो चुका है।
जिसकी शिकायत ईओडब्ल्यू व लोकायुक्त में हो चुकी है। प्राथमिक जांच में शिकायत सत्य मिलने के बावजूद उसे दबा दिया गया। शायद नवनियुक्त जिला शिक्षा अधिकारी जांच की आंच अपने तक न आने पाए, इसलिए पत्रकारों पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रही हैं।
ऐसा आदेश डीईओ कैसे जारी कर सकती हैं। अभी-अभी तो जिला शिक्षा अधिकारी बनी हैं। उस आदेश को मुझे भेजो, मैं देखता हूँ।
गौरव बैनल, कलेक्टर