LPG गैस की किल्लत का बिचौलिये उठा रहे फायदा, 1500 में बिक रही टंकी, प्रशासन मौन

LPG घरेलू गैस की किल्लत शुरू होते ही बिचौलियों की चांदी हो गई है। जिन उपभोक्ताओं गैस नहीं मिल पा रही है उन्हें विचौलिये मनमाफिक दाम पर गैस बेच रहे हैं। आपदा में अवसर की तलाश करने वाले बिचौलिये हर गैस एजेंसी के बाहर घूमते फिरते देखे जा सकते हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब जिले में गैस लोगों को आसानी से नहीं मिल रही है तो फिर इन बिचौलियों को गैस कहां से मिल रही है। जिले के जिम्मेदार लोग बिचौलियों पर अंकुश क्यों नहीं लगा पा रहे हैं। हालांकि खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का दावा है कि जिले में घरेलू गैस की कमी नहीं है। फिलहाल वे दावा जो भी कर रहे हों, लेकिन गैस एजेंसियों के बाहर गैस सिलेंडर के लिए लगने वाली भीड़ कम नहीं हो रही है।

छोटी-छोटी कमियां बताकर लोगों को नहीं दी जा रही LPG गैस

जो लोग गैस की बुकिंग कर रहे हैं, उनको समय पर डिलीवरी नहीं हो पा रही है, जो उपभोक्ता ऑनलाइन गैस की बुकिंग कर रहे हैं, उन्हें भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि कभी ई-केवाईसी की समस्या तो कभी पास बुक में एंट्री की समस्या बताकर तो कभी गैस के दाम बढ़ने की समस्या बताकर गैस नहीं दी जा रही है। वहीं ऑनलाइन बुकिंग करने में समय पर उपभोक्ताओं के फोन रिसीव नहीं होते हैं। यानी छोटी-छोटी समस्याएं बताकर उपभोक्ताओं को उलझा दिया जा रहा है, जिससे समय पर लोगों को गैस नहीं मिल पा रही है।

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एलपीजी गैस की समस्या से पब्लिक परेशान

एलपीजी गैस की समस्या से पब्लिक परेशान हो रही है और इस परेशानी को दूर करने के लिए जिम्मेदार लोगों द्वारा कंट्रोल रूम तक स्थापित नहीं किया गया है। ऐसे में छोटी-छोटी समस्याओं से पीड़ित उपभोक्ता अपनी समस्या का निराकरण कराने कहां जायें, क्योंकि एजेंसी वालों के पास इतना समय नहीं रहता। वहीं खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी न तो गैस एजेंसियों में मिलते न अपने कार्यालय में, जिससे पब्लिक की समस्या का निराकरण ही नहीं हो पाता है। गैस न मिलने की छोटी-मोटी समस्या का निराकरण करने व शिकायत दर्ज कराने के लिए आपतकालीन स्थिति में जिला स्तरीय कंट्रोल रूम बना दिया जाए, जहां पर लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें।

कालाबाजारी पर सख्ती की जरूरत

गैस की कमी का फायदा बिचौलिए न उठाएं, इसके लिए सख्ती की जरूरत है। उपभोक्ताओं को समय पर गैस मिले, इसके लिए जरूरी है कि एजेंसियों और गैस गोदामों के स्टॉक की नियमित जांच हो। जिले में 2 लाख 44 हजार उपभोक्ता हैं, जिनमें एलपीजी का वितरण करने की IOCL, BPCLऔर HPCL के जिम्मेदारी है। आसानी से गैस न मिलने और कालाबाजारी से बचने के लिए गरीब वर्ग के लोग अब चूल्हा, सिगड़ी आदि विकल्प अपना रहे हैं।

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