Singrauli News : सिंगरौली विस्थापन मंच के सोशल मीडिया ग्रुपों में इन दिनों एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के सिंगरौली पुनर्स्थापन सेल द्वारा मुआवजा निर्धारण समिति (डीएसवीटी एवं सीएफसी) को पात्रता संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक एनसीएल के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इस पत्र की प्रामाणिकता अथवा इसके क्रियान्वयन को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
वायरल पत्र के अनुसार यदि एक ही परिवार के सदस्य होने के बावजूद भूमि और भवन का स्वामित्व अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर है तथा उसका वैध प्रमाण 9 फरवरी 2024 से पूर्व का है, तो ऐसे सभी पात्र सदस्यों को अलग-अलग विस्थापन लाभ दिए जाएंगे। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल एक ही समग्र आईडी में नाम दर्ज होने या पारिवारिक संबंध होने के आधार पर किसी व्यक्ति की पात्रता प्रभावित नहीं होगी।
पत्र में उल्लिखित प्रावधानों के मुताबिक ऐसे मामलों में भूमि और भवन स्वामित्व को प्राथमिक आधार माना जाएगा। यदि भूमि और भवन के स्वामी अलग-अलग सदस्य हैं और स्वामित्व के दस्तावेज निर्धारित तिथि से पूर्व के हैं, तो प्रत्येक पात्र सदस्य को स्वतंत्र इकाई मानते हुए पुनर्वास एवं मुआवजा लाभ प्रदान किया जा सकेगा।
वायरल दस्तावेज में पूर्व से लागू पुनर्वास पैकेज का हवाला देते हुए संकेत दिया गया है कि पात्र व्यक्तियों को प्लॉट के बदले 18 लाख रुपये तक के लाभ मिल सकते हैं। हालांकि अंतिम पात्रता का निर्धारण डीएसवीटी और सीएफसी द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही किया जाएगा।
सिंगरौली विस्थापन मंच से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों को लाभ मिलेगा और लंबे समय से चली आ रही पात्रता संबंधी विवादों का समाधान हो सकेगा।
फिलहाल चूंकि एनसीएल प्रबंधन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, इसलिए वायरल पत्र में वर्णित प्रावधानों को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है। वहीं प्रभावित परिवारों के बीच इस पत्र को लेकर चर्चा और उम्मीदें दोनों बढ़ गई हैं।
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