Singrauli News: सिंगरौली जिले में पदस्थ उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गए हैं। बैढ़न निवासी एक अधिवक्ता ने उच्च अधिकारियों को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया है कि जमीन रजिस्ट्री के नाम पर उनसे अवैध रूप से 50 हजार रुपये की मांग की गई, साथ ही जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और पैसे न देने पर आपराधिक मामला दर्ज कराने की धमकी भी दी गई।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि 16 दिसंबर 2025 को जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त रकम की मांग की गई थी। अधिवक्ता के अनुसार पहले 6 मार्च 2026 को यूटीआर नंबर के माध्यम से 15 हजार रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया। इसके बाद 30 मार्च 2026 को रजिस्ट्री आईडी क्रमांक 30032600574749 के तहत 40 हजार रुपये का भुगतान किया गया। वहीं 31 मार्च 2026 को रजिस्ट्री आईडी 31032600593661 के अंतर्गत 10 हजार रुपये और जमा किए गए।
इस प्रकार कुल भुगतान और लेन-देन का पूरा विवरण आवेदन पत्र में संलग्न किया गया है, जिससे आरोपों को प्रमाणित करने का प्रयास किया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि उप पंजीयक के एक रिश्तेदार साहिल के माध्यम से भी लगातार दबाव बनाया गया और भुगतान के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ि़त किया गया। इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
वायरल ऑडियो में कथित रूप से एक व्यक्ति यह कहते हुए सुनाई दे रहा है कि अभी तक पैसा क्यों नहीं जमा किया, अगर नहीं किया तो सीधे थाने में अपराध दर्ज करा दूंगा। इस ऑडियो के सामने आने के बाद न केवल जिले में बल्कि प्रदेश स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं वायरल ऑडियो ने जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार की छवि को भी प्रभावित किया है। आमजन में यह सवाल उठ रहा है कि यदि शिकायतों के साथ प्रमाण और ऑडियो जैसी सामग्री मौजूद है, तो आखिर अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
उप पंजीयक कार्यालय में दलालों का बोलबाला
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित उप पंजीयक (सब रजिस्ट्रार) कार्यालय इन दिनों चर्चाओं में बना हुआ है। यहां कार्यालय समय के दौरान आधा दर्जन कथित दलालों की लगातार मौजूदगी पर सवाल उठने लगे हैं। आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि ये लोग आखिर किस काम से दफ्तर में बने रहते हैं और उनकी भूमिका क्या है, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि इन व्यक्तियों को अंदरूनी संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते वे खुलेआम कार्यालय परिसर में सक्रिय रहते हैं।
बताया जा रहा है कि दस्तावेजों के पंजीयन से जुड़े कार्यों में दलाली और वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। चर्चा में जिन नामों का जिक्र हो रहा है, उनमें बुद्धसेन सिंह, साहिल सिंह और राजेंद्र दुबे शामिल हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितना गंभीरता से लेता है और क्या जांच के जरिए स्थिति स्पष्ट हो पाती है।
9 वर्षो से सिंगरौली में पदस्थ हैं उप पंजीयक
गौरतलब है कि उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार पिछले लगभग 9 वर्षों से सिंगरौली जिले में पदस्थ हैं। इतने लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ पहले भी भ्रष्टाचार और अन्य अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
बताया जा रहा है कि इन शिकायतों की जांच भी हुई, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई का अभाव बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार सिंगरौली विधायक द्वारा भी इस मामले सहित अन्य शिकायतों को लेकर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और श्रम मंत्री तक अपनी बात पहुंचाई जा चुकी है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि भोपाल स्तर पर बैठे कुछ विभागीय अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्रवाई प्रभावित हो रही है।
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