Singrauli News: यात्री सुविधाओं की बात हो या बसों के व्यवस्थित खड़ी करने की हो, सब काम मनमाने तरीके से हो रहा है। मुसाफिरखाने में अतिक्रमणकारियों द्वारा कब्जा जमा लिया गया है, बची-खुची जगह पर मवेशी और आवारा कुत्ते कब्जा जमाए रहते हैं।
वैढ़न शहर में स्थित बस स्टैंड को शहर से दूर स्थापित किए जाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है, लेकिन बस स्टैंड को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए आज तक कोई पहल नहीं की गई है। कुछ समय पहले महापौर द्वारा बस स्टैंड को शिफ्ट करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन को पत्र जरुर लिखा गया था, लेकिन आज तक न तो जमीन उपलब्ध कराई गई और न बस स्टैंड में सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कोई पहल ही की गई है।
ऑटो की मची रहती है धमाचौकड़ी
कहने के लिए तो बस स्टैंड परिसर के अंदर ऑटो और अन्य टैक्सी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध है, लेकिन परिसर के अंदर दिनभर ऑटो और टैक्सीवालों की धमाचौकड़ी मची रहती है। परिसर के अंदर ऑटो और टैक्सी पहुंचने से बस चालकों के अलावा पब्लिक को खासी परेशानी उठानी पड़ती है। यात्रियों के चक्कर में ऑटो चालक बस स्टैंड के अंदर ऑटो लेकर पहुंच जाते हैं। जिससे बसों को निकलने तक के लिए जगह नहीं मिलती है। परिसर के अंदर और बाहर दोनों जगहों पर ऑटो वालों का कब्जा रहता है, जिससे हर किसी को परेशानी हो रही है, मगर जिम्मेदार लोगों द्वारा व्यवस्था में सुधार करने के लिए कभी प्रयास तक नहीं किए गए है।
अतिक्रमण की चपेट में पूरा परिसर
बस स्टैंड परिसर की बात की जाए तो पूरा परिसर अतिक्रमण की चपेट में है। दुकानदार अपनी दुकानों का सामान फैलाकर बाहर रखते हैं। भोर में आने वाली बसें दिनभर बस स्टैंड में खड़ी रहती हैं, जिससे बस स्टैंड में बसों को खड़ी करने के लिए जगह तक नहीं मिलती है। परिसर के अंदर, फल, चाट-फुल्की, पान के ठेले लगाए जाने से बसों को परिसर में आने जाने में दिक्कत होती है। बड़ी मुश्किल से बसें बस स्टैंड के अंदर आ-जा पाती हैं। लंबी दूरी की जो बसें सुबह आती हैं, उनको दूसरी जगहों पर पार्क करने के निर्देश हैं, लेकिन बसें बस स्टैंड में ही दिनभर पार्क की जाती हैं।
नये बस स्टैंड की दरकार
शहर के बीचोंबीच बने बस स्टैंड को दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। जिस तेजी से शहर की बसाहट बढ़ रही है, उससे शहर की आबादी में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। शहर की बसाहट और आबादी के लिहाज से बस स्टैंड छोटा पड़ने लगा है। बस स्टैंड दूसरी जगह पर शिफ्ट होना चाहिए, लेकिन कोई भी जिम्मेदार पहल नहीं कर रहा है। समय रहते अगर नये बस स्टैंड को लेकर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले समय में बस स्टैंड में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलेगी।
क्या कहते हैं लोग
कहने के लिए अंतर्राज्यीय बस स्टैंड है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ व्यवस्था नहीं है। पीने के लिए साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है। प्यास लगने पर खरीदकर पानी पीना पड़ता है।
मुकेश शाह, यात्री
बस स्टैंड परिसर और मुसाफिरखाने में मवेशियों का कब्जा रहता है। बची-खुची जगह पर दुकानें लगाई जाती हैं। यात्रियों के बैठने तक के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, यात्री सुविधाओं में विस्तार होना चाहिए।
अखिलेश पांडेय, यात्री
कायदे से वर्षों पुराने बस स्टैंड को दूसरी जगह शिफ्ट कर देना चाहिए। बीच शहर में होने से आवागमन में दिक्कत होती है। यात्री सुविधाओं के नाम पर कुछ खास नहीं है। व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है।
जगदीश प्रसाद, यात्री
साफ पानी तक नहीं मिलता
अंतर्राज्यीय बस स्टैंड में लोकल बसों के अलावा लंबे रूट इंदौर, भोपाल, वाराणसी, छत्तीसगढ़ सहित अन्य जगहों से बसों का दिन-रात आवागमन होता है। दूरदराज से आने वाले यात्रियों के लिए पीने के लिए साफ पानी तक की व्यवस्था नहीं है।
पानी के नाम पर मुसाफिरखाने में घड़े रखे गए हैं, जिन घड़ों के पानी को जानवर जूठा कर देते हैं। जिसके चलते लोग प्याऊ का पानी नहीं पीते हैं। बस स्टैंड परिसर में एक वाटर कूलर जरूर लगाया गया है, लेकिन वह जब चाहे तब खराब पड़ा रहता है। हैंडपंप के चारों तरफ इतनी गंदगी बजबजाती रहती है कि कोई पानी पीने के लिए नहीं जाता है।
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