Singrauli News: पूर्व में प्रस्तावित प्रयागराज-सिंगरौली राष्ट्रीय राजमार्ग 135सी का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। इस एलॉयमेंट में अब दोबारा एनएच बनने से रहा। फिर भी करोड़ों रूपये का निवेश कर लोगों ने मोरवा-चितरंगी रोड में आवागमन करने बाले लोगों को खतरे में डाल दिया है। यहां पर हुए शरणस्थली हो सकते हैं। बारिश के दिनों में रह-रहकर गिरते मकान किसी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
यह स्थितियां सिर्फ एक ही स्थान पर नहीं बल्कि खिरवा से लेकर चितरंगी तक देखने को मिलती है। रोड का एलायंमेंट कहीं पर आबादी क्षेत्र से होकर गुजरा था, तो कहीं जंगल और पहाड़ से। उन्हीं रकबों पर आज भी तीन से चार पांच हजार वर्ग फुट की जर्जर ढलाई व जीआई शीट वाले मकान बने हुए हैं। हाल ही में आई आंधी और बारिश में ढ़हकर गिरने के बाद दूर से ही इनके खतरनाक होने का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जायसवाल चौराहा, कसर तिराहा ऐसे स्थान है, जहां पर लोगों ने ग्राउंड फ्लोर पर ढलाई करके और उसके ऊपर टीन शेड डालकर नकली मकान मुआवजे के लिए तैयार किए थे, लेकिन रोड का एलॉयमेंट निरस्त होने के बाद अब वे मकान जिसे लोग अपना होने और मुआवजा लेने हो गए है, वे मकानों में लगे दरवाजे खिड़की तक निकालने नहीं आ रहे हैं। जिससे कबाड़ियों की लगातार बढ़ोत्तरी होती जा रही है। हर दिन क्विंटलों जीआई शीट, दरवाजे, खिड़की, पाइप, एंगल और सरिया मकानों से निकालकर स्थानीय युवा कबाड़ की दुकान पहुंचा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के लिए बने हैं खतरा
जिन गांवों व कस्बों के आसपास ऐसे मकान बने हुए हैं, उनका कहना है कि इन मकानों के अंदर जमीन पर प्लास्टर है और न पक्का किया गया है। लिहाजा कीड़े और जहरीले जीव-जंतुओं के निकलने का भय बना रहता है। जब भी तेज हवा या आंधी की स्थितियां बनती हैं, कहीं से भी उड़कर टीवष्टेड आने का खतरा भी बना रहता है। मुसीबत यह है कि इस रोड के मूल निवासियों को भी अब यह नहीं पता है कि यहां पर कौन सा व्यक्ति मकान बनाकर लापता है।
प्रशासन को लेना चाहिए संज्ञान
भले ही इन मकानों को निजी जमीनों पर बनाया गया है, लेकिन आम लोगों के लिए इनसे खतरा उत्पन्न हो रहा है। नित नये नवयुवक कबाड़ चोरी के व्यवसाय में उतर रहे हैं। अराजकता का वातावरण निर्मित हो रहा है, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन के ऐसे मकानों को तोड़ने का नोटिस जारी करना चाहिए। यदि फिर भी नहीं हटाए जाते हैं, तो प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए हटाने की कार्रवाई की जानी चाहिए।
बेहद कमजोर मकान कर रहे उपयोग
सड़क के किनारे बने बेहद कमजोर और उपयोगी नहीं होने के बाद भी कई स्थानों पर लोग इनमें दुकान चला रहे हैं। जानकारी लेने पर बताया कि मकान बनाने वाले बाहरी थे, नहीं आने पर उसका उपयोग स्थानीय लोग પુત્રા अपने वाहन आदि खड़ा करने के लिए कर रहे हैं। कई वर्ष पुराने हो चुकने पर ऐसे नकली मकान और भी कमजोर हो चुके हैं। कई मकानों की छत पर पानी भरा हुआ है। ऐसे मकानों के उपयोग करने पर भी सुरक्षा के लिहाज से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।