Vat Savitri Vrata 2026: शनिवार को ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। सनातन धर्म में इस व्रत को पति की लंबी उम्र, परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार वट सावित्री व्रत पर शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन महिलाएं बरगद के वृक्ष की पूजा कर पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने बरगद के वृक्ष के नीचे अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे।
तभी से वट वृक्ष को अक्षय वृक्ष माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष वट सावित्री व्रत पर गजकेसरी योग और बुधादित्य योग जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिन्हें पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पूजा सामग्री की बढ़ी खरीदारी
व्रत को लेकर बाजारों में पूजा सामग्री, फल और मिठाइयों की खरीदारी बढ़ गई है। महिलाओं द्वारा सावित्री-सत्यवान की तस्वीर, कच्चा सूत, रोली, अक्षत, धूप, दीप, कलश, भीगे काले चने, मौसमी फल और घर में बने पकवानों की तैयारी की जा रही है। धार्मिक परंपरा के अनुसार महिलाएं बरगद के वृक्ष की पूजा कर उसके चारों ओर कच्चा सूत बांधती हैं और व्रत कथा सुनती हैं।