Singrauli News: अजगुढ़ आदिवासी बस्ती में नहीं है बिजली, पानी, सड़क की सुविधा

Singrauli News: आदिवासी बाहुल्य गांव अजगुढ़ के आदिवासी बस्ती में आज तक बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं। सड़क-बिजली न होने से आदिवासी बस्ती के लोगों का किसी तरह से काम चल जाता है, लेकिन बस्ती में पानी की समस्या होने से बस्ती के लोगों का जीवन कठिन हो रहा है।

आदिवासी बस्ती में दो दर्जन से अधिक परिवारों की बसाहट है, लेकिन आज तक वहां पर मूलभूत सुविधाएं शासन-प्रशासन द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। जन सुनवाई में एक दर्जन से अधिक बार बस्ती के लोग पानी की समस्या को दूर करने के लिए हैंडपंप खनन कराए जाने के लिए आवेदन दे चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया है।

पानी के लिए जाना पड़ता है दूर

अजगुढ़ की आदिवासी बस्ती में ज्यादातर गरीब वर्ग के लोग रहते हैं। ज्यादातर मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। बस्ती के रहवासी लाले गोंड़, ईश्वरदास, गुड्डी देवी, संतकुमारी, मोहन लाल, रामजी, रामदास, बाबूलाल अगरिया, जुकनी देवी, प्रमिला देवी और जगलाल सहित अन्य लोगों ने पानी की समस्या को दूर करने के लिए बस्ती में हैंडपंप खनन कराए जाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की व्यवस्था न होने से दूरदराज जगहों पर पानी लेने के लिए प्रतिदिन जाना पड़ता है। इसमें बहुत परेशानी होती है।

डिजिटल जाति प्रमाणपत्र नहीं हो रहा जारी

वर्तमान समय में सरकारी कार्यालयों में ज्यादातर काम ऑनलाइन हो गया है। जाति प्रमाणपत्र बनाने का काम भी ऑनलाइन होता है और डिजिटल जाति प्रमाणपत्र बनाए जा रहे हैं, लेकिन जिले के देवसर एसडीएम कार्यालय में डिजिटल जाति प्रमाणपत्र नहीं जारी किए जा रहे हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हरांविरान निवासी कमलेंद्र प्रताप बैस ने शिकायत की है कि साल 2013 में उनका ऑफलाइन जाति प्रमाणपत्र बनाया गया था। अब शासन द्वारा डिजिटल प्रमाणपत्र की मांग की जाती है, जिसको बनवाने के लिए कमलेंद्र ने लोक सेवा केंद्र में आवेदन किया, लेकिन उसके आवेदन को यह कहते हुए रिजेक्ट कर दिया गया कि अभी देवसर एसडीएम कार्यालय में डिजिटल जाति प्रमाणपत्र बनाए जाने की व्यवस्था नहीं है।

पैसा जमा करने के बाद भी नहीं मिल रहा आवास

सिंगरौली विकास प्राधिकरण द्वारा बरगवां में अटल आवासीय योजना के तहत धर्मेंद्र कुमार कुशवाहा निवासी नवजीवन विहार विंध्यनगर को आवास आवंटित किया गया था। आवंटित आवास की तय राशि का कुछ हिस्सा (7 लाख रुपये) जमा किया गया, लेकिन विकास प्राधिकरण द्वारा आज तक आवास नहीं दिया गया है। आवेदक का कहना है कि आवास के नाम पर सिर्फ जमीन में गड्‌ढे खोद दिए गए हैं। आवेदन ने जन सुनवाई में शिकायत दर्ज कराते हुए स्वीकृत आवास नंबर बी-3 का पूरा निर्माण कराकर दिए जाने की मांग की गई है।

एक किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है पानी

माड़ा के बसौड़ा दक्षिण टोला में जल संकट व्याप्त है। पीने के पानी की व्यवस्था न होने से टोला के लोग एक किलोमीटर दूर पानी लेने जाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। मोहल्ले में हर साल गर्मी के सीजन में पीने के पानी की समस्या खड़ी हो जाती है। गांव के लोग लंबे समय से पानी की समस्या का निराकरण किए जाने की मांग पीएचई विभाग से कर रहे हैं, लेकिन आज तक विभाग द्वारा एक हैंडपंप तक नहीं खुदवाया गया है। स्थानीय निवासी नारायण प्रजापति, दयानंद प्रजापति, सुखमन यादव, हंशलाल खैरवार, फोलाल, झुमक लाल खैरवार, दिनेश खैरवार, महावीर यादव सहित अन्य लोगों ने पानी की समस्या को दूर करने के लिए नए हैंडपंप का खनन कराए जाने की मांग की है।

250 आवेदक पहुंचे शिकायत लेकर

प्रत्येक मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित होने वाली जन सुनवाई में दूरदराज गांवों से लोग शिकायते लेकर आते हैं। इस मंगलवार को 250 से अधिक आवेदक शिकायतें लेकर आए थे। ज्यादातर शिकायतें पानी की समस्या, सड़क, बिजली, पानी से जुड़ी हैं। जिला पंचायत सीईओ जगदीश गोमे ने आवेदकों की शिकायतों को सुनकर संबंधित विभागों के अधिकारियों को शिकायतों का तय समय सीमा के अंदर निराकृत किए जाने के निर्देश दिए हैं।

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