Singrauli News: राष्ट्रीय राजमार्ग रीवा-रांची-39 का निर्माण कार्य पूर्ण करने के लिए एक बार पुनः प्रक्रिया तेज हुई और नये सिरे से एनएचएआई ने टेंडर बुलाए थे। जिसकी प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए मेसर्स केसीसी बिल्डिकॉन प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा एल वन होकर फोरलेन में कार्य करने की तैयारी की गई। इसी दौरान एनएचएआई ने एमपीआरडीसी से यह रोड हैंडओवर ले लिया और अपूर्ण फोरलेन के निर्माण की जिम्मेदारी ले ली, लेकिन अब तक सिंगरौली जिले में कार्य नहीं शुरू हो पाया है, जबकि फोरलेन और अधिकांश पुल जिले में ही अपूर्ण या क्षतिग्रस्त हैं।
मार्च महीने तक एग्रीमेंट नहीं होने को लेकर समय व्यतीत हुआ और अप्रैल के पहले सप्ताह में केसीसी ने एक दूसरी पार्टी को रोड का नये सिरे से सर्वे करने का कार्य दे दिया। जिसके उपरांत ऐसा माना जा रहा था कि एक-दो सप्ताह के अंदर ही केसीसी सिंगरौली जिले में अपना कैम्प बना लेगी। बल्कि यह भी कहा जा रहा था कि बरगवां के डगा में स्थिति टीबीसीएल के कैम्प और मशीनरीज को भी को भी हायर किया जा चुका है, लेकिन अभी तक जिले में कहीं भी कार्य शुरू हो की खबर नहीं है, जबकि कुछ छोटे-छोटे कार्यों से बड़ी समस्याओं का समाधान बारिश होने के पूर्व ही पाया जा सकता था। उन पर कार्य करके कहीं पर टू लेन तो कहीं पर फोरलेन चालू करने की कवायद की जा सकती थी।
सजहर के पुल को चालू करना भी जरूरी
बताया जाता है सहजर के कोहराखोह खाखर नाले में एक पुरानी पुलिया बनी हुई है। जिसके बगल में नया पुल भी बना हुआ है, लेकिन चालू नहीं है। इसलिए पुरानी पुलिया से होकर वाहन गुजरते हैं। बारिश के दौरान पुलिया के ऊपर पानी आ जाता है फिर पानी उतरने तक आवागमन बाधित हो जाता है। कई बार तो पूरी रात दोनों तरफ वाहन पानी कम होने के इंतजार में रुके रहते हैं। इस स्थान पर त्वरित कार्य किए जाने की जरूरत है।
बरगवां के कसर, नौढ़िया पर अवरोध
एनएच-39 के कसर गेट के पुल और गोरबी के नौड़िया के पास निर्माणाधीन पुल से बायपास नही शुरू हो पाया है। कसर गेट, नौढ़िया के अलावा मोरवा के अटल ट्रांसपोर्ट नगर के सामने भी एक पुलिया अधूरी है, जिसकी वजह से फोरलेन बाधित है और पूरी सड़क पर वाहनों का कब्जा बना हुआ है। यदि इस पुलिया को बना लिया जाए तो मोरवा के बीच से गुजरने वाले फोरलेन को स्मूद किया जा सकता है।
कर्युआ के पास एक पुलिया खतरनाक
कर्थुआ के अंदर जाने वाली सड़क के पास एक पुलिया क्षतिग्रस्त होने से आवागमन में समस्या होती है। जिसे चालू करने के लिए के लिए महज एक से डेढ़ महीने का समय काफी था। इसमें पर आवश्यकतानुसार कार्य करके बारिश से पूर्व चालू किया जा सकता था। अधिक बारिश होने पर यहां पर भी आवागमन बाधित हो जाता है। स्थानीय लोग रोड से उत्तर कर बाजार जाने के लिए कच्चे मार्ग को उपयोग करते हैं। यहां पर एनएच के फोर लेन की मरम्मत करना जरूरी था, जहां पर भी कार्य नहीं किया गया है।
चटका नाले के प्रिकास्ट को होता लोड टेस्ट
दो वर्षों से चटका पुल में प्रीकास्ट गर्डर रखे हुए हैं, लेकिन उनसे भारी वाहनों के गुजरने की मनाही है या फिर पुल को रोड से नहीं जोड़ा गया है। वजह सिर्फ लोड टेस्ट नहीं होना है। बताया जा रहा है कि इस प्रकार के पुलों को बनाने से पूर्ण उनका लोड टेस्ट किया जाता है और उसके बाद ही वाहनों की आवाजाही शुरू होती है। कंपनी यदि खनहना की ओर से कार्य शुरू करती तो इसका लोड टेस्ट कराकर चटका पाले के पुल को भी चालू कर सकती थी, जो कि आवागमन बाधित होने की आशंका पर विराम लगा सकता है।
परेवा नाला पर लॉन्च करते गर्डर
गोरबी मोरवा के बीच बारिश शुरू होते ही परेवा नाले के पास चढ़ाई होने से वाहनों के बैंक होने अथवा जाम आदि लगने की आशंका बनी रहती है। यदि परेवा नाले के पूर्व से तैयार स्ट्रक्चर पर प्रीकास्ट गर्डर रख दिए जाते तो इसे भी चालू किया जा सकता था। कंपनी इन सभी पुल व पुलियाओं से वाकिफ है और सिंगरौली में आवागमन बाधित करने वाले तीन-चार अवरोधों को पूर्ण किया जाना चाहिए था।
क्या कहते हैं सांसद
– एनएच-39 का निर्माण कार्य शुरू है। सीधी की ओर कई स्थानों पर गड्डों को भरा गया है। गोपद पुल से सिंगरौली की ओर सर्वे कार्य कराया जा रहा है। मोरवा के पास सइट भी देख ली गई है, जाई पर कंपनी अपने मशीनरी व सामग्री का स्टॉक करेगी। बारिश में कहीं भी आवागमन बाधित नहीं होने दिया जायेगा।
डॉ. राजेश मिश्रा, सांसद सीधी
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