Singrauli News: निगाही विस्तार परियोजना की कछुआ चाल महज 9.33 प्रतिशत ही बांट पाए मुआवजा !

Singrauli News: एक तरफ एनसीएल और कोल इंडिया देश की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति करने की प्लानिंग करने और उन्हें जमीन पर उतारने के प्रयास में जी-जान से जुटी रहती है, तो वहीं दूसरी ओर कंपनी के ऐसे प्रयासों को जमीनी हकीकत देने का कार्य करने वाले स्थानीय स्तर के जिम्मेदार अगर पलीता लगाने में जुटे हैं, तो सवाल उठना लाजमी है।

दरअसल, यह मामला है एनसीएल द्वारा निगाही विस्तार परियोजना के लिए ग्राम मुहेर में अधिग्रहित की जा रही भूमियों का है, जिसमें करीब वर्ष 2020 के दौरान सीबी एक्ट के तहत क्रमशः धारा-4, 7, 9 व 11 लगने के बाद इस परियोजना से जुड़ी प्रक्रियाएं शुरू हो गई थीं। इस परियोजना में भूमि और परिसंपत्तियों के लिए 1446.61 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतना समय व्यतीत होने के बाद भी अभी 31 मार्च 2026 तक प्रभावित परिवारों को केवल 135 करोड़ रुपये का ही भुगतान हो सका है।

यानी स्वीकृत राशि का करीब 9.33 प्रतिशत ही वितरित किया गया है। ऐसे में परियोजना प्रभावित परिवारों तक मुआवजा पहुंचाने की प्रक्रिया की रफ्तार पर सवाल भी उठ रहे हैं। सूत्र भी बताते हैं कि इस विस्तार परियोजना से जुड़े तमाम कार्यों की जिम्मेदारी निगाही प्रोजेक्ट के जिन विभागों के पास हैं, उसे के जिम्मेदारों के बीच विभागीय खींचतान इस कदर हावी है कि किसी को राष्ट्रहितार्थ इस विस्तार परियोजना की फिक्र नहीं है और लेटलतीफी का खामियाजा इसके प्रभावित भुगत रहे हैं।

यह भी जानिए

कंपनी से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस विस्तार परियोजना के लिए 564.323 हेक्टेयर भूमि का अधिसूचनाकरण कोल बेयरिंग एरियाज (अधिग्रहण एवं विकास) अधिनियम 1957 के तहत किया गया है। इसके अलावा करीब 200 हेक्टेयर काश्तकारी (टेनेंसी) भूमि भी परियोजना क्षेत्र में शामिल है।

प्रबंधन का रुख

प्रबंधन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था भविष्य में पुनर्वास एवं पुर्नस्थापन कार्यों के लिए एक मॉडल साबित होगी। कंपनी के अनुसार यह पहल डिजिटल इंडिया के विजन के अनुरूप पारदर्शी, दक्ष और हितग्राही-केंद्रित प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगी तथा मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को गति देगी।

प्रबंधन के सूत्रों का कहना है कि इस परियोजना के प्रभावित परिवारों (पीएएफएस) को मुआवजा भुगतान के लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू करने की घोषणा की गई है। अब वर्षों से चली आ रही भौतिक चेक वितरण प्रणाली को समाप्त कर इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (ईएफटी) के माध्यम से राशि सीधे लाभार्थियों के सत्यापित बैंक खातों में भेजी जा रही है।

दावा है कि नई व्यवस्था से भुगतान प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और सुरक्षित होगी। इससे चेक वितरण में होने वाली प्रशासनिक जटिलताएं, विलंब और सुरक्षा संबंधी जोखिम समाप्त होंगे तथा परियोजना प्रभावित परिवारों का पैसा सीधे उनके खातों में पहुंचेगा। इस नवाचार के पीछे भले कंपनी की मंशा साफ-सुथरी है, लेकिन भुगतान में हो रही देरी को तो नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि बड़ी संख्या में परियोजना प्रभावित परिवार अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।

5100 प्रभावित, भुगतान अब भी अधूरा कंपनी से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार इस विस्तार परियोजना में अधिग्रहित भूमियों के लिए 483.91 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत है, जबकि अब तक केवल 25 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इस श्रेणी में 2400 भू-स्वामी शामिल हैं। वहीं परिसंपत्तियों (एसेट) के लिए 962.70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 110 करोड़ रुपये ही वितरित हुए हैं।

इस श्रेणी में 2700 परिसंपत्ति स्वामी शामिल हैं। यानी कुल 5100 परियोजना प्रभावितों के लिए स्वीकृत 1446.61 करोड़ रुपये में से अधिकांश राशि का भुगतान अभी शेष है, जो अपने आप में सवाल खड़े करता है।

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