Singrauli News : सिंगरौली में रेलवे लाइन और पुल निर्माण को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी, मुआवजा और पुनर्वास की मांग हुई तेज

Singrauli News :  सिंगरौली जिले के सरई तहसील अंतर्गत ग्राम गजरबहरा, धिरौली एवं आसपास के प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों ने रेलवे लाइन और पुल निर्माण कार्य को लेकर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि अडानी कंपनी द्वारा क्षेत्र में निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है, लेकिन प्रभावित किसानों और परिवारों को अब तक न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही पुनर्वास से संबंधित स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

ग्रामीणों के अनुसार रेलवे लाइन और पुल निर्माण परियोजना से उनकी कृषि भूमि, आजीविका और भविष्य पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। इसके बावजूद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया, मुआवजे की राशि और पुनर्वास की व्यवस्था को लेकर प्रशासन एवं कंपनी की ओर से पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर किसानों और आम नागरिकों के अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। उनका आरोप है कि बिना सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी किए निर्माण कार्य जारी रखा जा रहा है, जिससे प्रभावित परिवारों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

प्रभावित परिवारों ने उठाए कई सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भूमि अधिग्रहण किस कानून के तहत किया जा रहा है। साथ ही मुआवजा वितरण की समयसीमा और पुनर्वास की योजना के संबंध में भी कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है। इससे प्रभावित परिवारों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।

प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएं। इसके अलावा सभी पात्र प्रभावित परिवारों को तत्काल विधिसम्मत मुआवजा और पुनर्वास लाभ प्रदान किए जाएं। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जब तक सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही प्रभावित लोगों की समस्याओं और आपत्तियों को सुनने के लिए क्षेत्र में खुली जनसुनवाई आयोजित करने की मांग भी की गई है।

आंदोलन की चेतावनी

आनन्द पाण्डेय एवं अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र और न्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं की गई तो वे लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी जिम्मेदारी संबंधित कंपनी और प्रशासन की होगी।

ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा, जिससे विकास कार्यों और प्रभावित परिवारों के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

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