PM Janman Yojana: जिले में 449 शिविर आयोजित, लेकिन बैगा जाति तक नहीं पहुंची पीएम जनमन योजना

PM Janman Yojana: प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत जिले में वर्ष 2024-25 में देवसर, चितरंगी एवं अन्य विकासखंडों में कुल 449 पॉच चरणों में शिविर आयोजित किए जाने का दावा किया गया था। इन शिविरों का उद्देश्य विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति बैगा समुदाय के लोगों को चिन्हित कर उन्हें विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाना था। इस पूरे अभियान की जिम्मेदारी आदिम जाति कल्याण विभाग को नोडल एवं शिविर कराने का जिम्मा शहरी क्षेत्र में नगर निगम, नगर पंचायत एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जिला पंचायत के अधीन ग्राम पंचायतों के माध्यम से व्यापक स्तर पर शिविर आयोजित किए गए थे।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यहीं खड़ा हो रहा है कि जब इतनी बड़ी संख्या में शिविर आयोजित किए गए, तो बैगा समुदाय आज भी मूलभूत योजनाओं से वंचित क्यों है? हाल ही में एनसीएल परियोजना निगाही क्षेत्र की बैगा बस्ती में पिछले दिनों बेरहमी मारपीट के मामले में पीड़ित अन्नेलाल बैगा से  जब पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री राधा सिंह, सिंगरौली विधायक रामनिवास शाह और भाजपा जिलाध्यक्ष सहित अन्य जनप्रतिनिधि के साथ-साथ म.प्र . राज्य  अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेले भी पहुंचे, तब जमीनी सच्चाई सामने आई।
बैगा समुदाय के लोगों ने खुलकर अपनी समस्याएं बताईं। उन्होंने कहा कि आज भी उन्हें राशन कार्ड, आधार कार्ड, लाड़ली बहना योजना, वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा उज्जवला गैस योजना का लाभ भी इन तक नहीं पहुंचा है। कई परिवार आज भी पारंपरिक ईंधन पर निर्भर हैं। स्थिति और भी चिंताजनक तब दिखी जब लोगों ने बताया कि बस्ती में न तो पक्की सड़क है और न ही पेयजल की समुचित व्यवस्था। पानी के लिए लोगों को भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। बूंद-बूंद पानी के लिए मारामारी जैसी स्थिति बनी हुई है। हालांकि अब एनसीएल के साथ-साथ नगर निगम के अधिकारियों की नींद टूटी है। संभवत: आज-कल तक में पानी सप्लाई चालू कराने के लिए कवायदे की जा रही हैं।

प्रदेश सरकार के विकास के दावे की पोल बैगा बस्ती से खुल गई  

 विपक्षी दल कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि म.प्र. में लंबे समय से सरकार द्वारा विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन बैगा जैसी संरक्षित जनजाति तक योजनाओं का लाभ न पहुंच पाना इन दावों पर सवाल खड़े करता है। कांग्रेसी नेताओं ने कहा है कि धरातल पर बैगा जनजनातियों का कितना विकास हुआ है, सरकार की पोल बैगा बस्ती से खुल गई है।
जिला मुख्यालय से 7 किलोमीटर दूर जब जिम्मेदार अधिकारी जायजा लेने कभी नही गये तो दूर-दराज, जंगलों एवं पहाड़ों के बीच बसे बैगा जनजातियों की दशा कैसी होगी,उनका रहन-सहन, उनकी आर्थिक स्थिति कितनी सुदृढ़ होगी, यह तो गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। अब जब मामला उजागर हुआ, तो भाजपा के जनप्रतिनिधि एवं सरकार की नुमाइंदे भागदौड़ कर अपनी नाकामियों को छुपाने में लगे हुये हैं।

दूरस्थ अंचलों की स्थिति और भी चिंताजनक होने की आशंका

प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी अधिकांश परिवारों को नहीं मिला है और कई लोगों को अब तक भूमि का पट्टा तक नहीं मिला है। गौर करने वाली बात यह है कि यह बस्ती जिला मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब इतनी नजदीकी बस्ती का यह हाल है, तो दूरदराज के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले बैगा समुदाय की स्थिति कितनी दयनीय होगी। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि योजनाएं कागजों में तो सफल दिखाई जाती हैं, लेकिन धरातल पर उनका असर नगण्य है। 449 शिविरों के आयोजन के बावजूद यदि पात्र हितग्राही योजनाओं से वंचित हैं, तो यह व्यवस्था की बड़ी विफलता मानी जा रही है।
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